अच्छी खबर: कुपोषण से मुक्ति दिलाएगा जिंको राइस, बायो टेक हब बनने लगे… पहले फेज में 50 किसानों और 10 गांवों को जोड़ा गया

41

अच्छी खबर: कुपोषण से मुक्ति दिलाएगा जिंको राइस, बायो टेक हब बनने लगे… पहले फेज में 50 किसानों और 10 गांवों को जोड़ा गया

पंकज दाऊद @ बीजापुर। जिले के दस गांवों में बायो टेक हब बनने लगे हैं और यहां जिंको राइस का उत्पादन होगा। जिंको राइस गर्भवती महिलाओं और बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने में कारगर साबित होगा।

कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख अरूण सकनी और वैज्ञानिक बीके ठाकुर ने बताया कि जिंको राइस में जिंक की मात्रा 22 से 25 पीपीएम यानि पार्ट पर मिलियन होती है जबकि चावल की दूसरी किस्मों में ये मात्रा 18 पीपीएम तक होती है।

यह भी पढ़ें :  अंडरगारमेंट धोने से किया इंकार‚ साहब ने भेजा नोटिस... हेड कांस्टेबल ने जवाब दिया– 'नहीं धो सकता‚ मेरे आत्मसम्मान को चोट लगती है' 

पिछले साल तीस हेक्टेयर में ये किस्म लगाई गई थी। महत्वाकांक्षी जिलों में खास गुणधर्म वाली किस्मों को लगाए जाने का एक प्रकल्प भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने शुरू किया है। जिंको राइस की पैदावार भी इसी मकसद से की जा रही है।

उन्होंने बताया कि ये चावल जिंक की अधिक मात्रा होने के कारण कुपोषण से जंग के लिए कारगर है। पापनपाल, नैमेड़, दुगोली एवं कुएनार समेत दस गांवों में इसके लिए बायो टेक हब बनाए जा रहे हैं। इस साल बीस हेक्टेयर में जिंको राइस का उत्पादन किया जाएगा। इसमें दस गांवों के पचास किसानों को जोड़ा गया है और इन्हें इसे लगाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

यह भी पढ़ें :  लॉकडाउन में बड़ी तबाही मचाने की फिराक में थे नक्सली, कटेकल्याण रोड़ में सड़क के बीचों बीच खोद रखा था सुरंग...जवानों ने मंसूबे को किया नाकाम

जिंको राइस के अलावा जिले में इंदिरा बरानी धान की किस्म की पैदावार की जाएगी। ये भी खास गुणधर्म वाली किस्म है। अल्पवर्षा में भी ये धान की किस्म उपज देती है। इसके अलावा कुछ और किस्मों को जिले में लगाया जा रहा है।

इस सिलसिले में गुरूवार को पापनपाल में किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें प्रोजेक्ट प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक अरूण सकनी, वैज्ञानिक बीके ठाकुर, केएल पटेल, भीरेन्द्र कुमार, आरएचईओ सोमनाथ मरकाम एवं कृषि तकनीकी प्रबंधक कमलेश सिन्हा मौजूद थे। प्रोजेक्ट में दो सहायकों की नियुक्ति भी की गई है।

यह भी पढ़ें :  जनपितुरी सप्ताह में 8 नक्सलियों ने किया सरेंडर... कलेक्टर बोले— गलत रास्ता त्यागें और सही रास्ता चुनें, सही रास्ता चुनकर ही मैं आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं

ऑफ सीजन में भी मिलेगी सब्जियां

वैज्ञानिक बीके ठाकुर ने बताया कि 15 किसानों को कम लागत वाले शेड नेट दिए जा रहे हैं। इसमें किसान ऑफ सीजन में भी सब्जियां लगाकर अच्छी आमदनी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत दलहनी फसलों में ऑर्गनिक खाद के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।

जिले में उन्नत नस्ल जमुनापारी बकरों का वितरण किया जाएगा। छह समूहों को एक-एक यूनिट बकरे दिए जाएंगे। एक यूनिट में दस बकरियां और एक बकरा होगा।