किसानों को कर्ज में डूबोने आमादा भूपेश सरकार- गागड़ा… धान खरीदी में एक माह विलंब, बारदानों की भी कमी

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किसानों को कर्ज में डूबोने आमादा भूपेश सरकार- गागड़ा… धान खरीदी में एक माह विलंब, बारदानों की भी कमी

पंकज दाउद @ बीजापुर। पूर्व वन मंत्री महेश गागड़ा ने आरोप लगाया है कि गिरदावरी कम कर भूपेश सरकार किसानों को कर्ज में डूबोने का उपक्रम रच रही है। बारदानों की कमी है और मौसम भी खराब है। ऐसे में एक माह विलंब से धान खरीदी करने से किसानों की माली हालत और खस्ता हो जाएगी।

पत्रवार्ता लेते पूर्व मंत्री महेश गागड़ा।

पूर्व वन मंत्री एवं भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीनिवास राव मुदलियार यहां पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। नेता द्वय ने कहा कि गिरदावरी में रकबा कम कर दिया गया है। इससे किसान पूरा धान नहीं बेच पाएंगे। किसानों ने ज्यादा रकबे के धान की बिक्री की प्रत्याशा में कर्ज लिया था। अब ऐसी स्थिति में वे कर्ज नहीं पटा पाएंगे और कर्ज में डूब जाएंगे।

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इधर, किसानों को पंजीयन के लिए परेशान किया जा रहा है। इससे धान बेचने में किसानों को परेशानी होगी। किसानों की मांग थी कि सभी केन्द्रों में इलेक्ट्राॅनिक तौल मशीन होनी चाहिए। इससे धान खरीदी में गड़बडी रोकी जा सकती है।

सरकार ने किसानों के साथ की वादा खिलाफी

भाजपा नेताओं ने कहा कि भूपेश सरकार ने किसानों के साथ वादा खिलाफी की है। किसानों ही नहीं बल्कि बेरोजगारों से भी सरकार ने छलावा किया है। भाजपा किसानों और बेरोजगारों के हित में संघर्ष करती रहेगी। पिछले साल टोकन लेने के बावजूद धान नहीं खरीदा गया।

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पहले पहली नवंबर से धान खरीदी होती थी लेकिन अब इसे एक दिसंबर कर दिया गया है। मौसम खराब है और इससे धान भी खराब हो सकता है। राज्य सरकार किसानों को हताशा की ओर ढकेल रही है और इससे किसानों की मानसिक और माली हालत खराब हो रही है। स्थिति खराब होने पर सारी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

अब तो भूपेश सरकार कई मामलों में कांग्रेसियों की ही आलोचना का शिकार हो रही है। सीएम भूपेश बघेल खुद का किसान पुत्र कहते हैं लेकिन वे ही किसानों के साथ अन्याय कर रहे हैं।

आंदोलन को अलोकतांत्रिक ढंग से कुचला

पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने आरोप लगाया कि भूपेश सरकार किसानों के आंदोलन को अलोकतांत्रिक ढंग से कुचल रही है। किसानों का आंदोलन 24 नवंबर को जिला मुख्यालय में होना था। इसके लिए भाजपा ने जिला प्रशासन से लिखित अनुमति मांगी थी लेकिन अनुमति नहीं दी गई और फिर कई थानों में वाहनों को जब्त कर लिया गया।

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गागड़ा के मुताबिक, अफसर सरकार के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। गंगालूर, तोयनार, कुटरू, गुदमा, नैमेड़, मद्देड़, भोपालपटनम आदि स्थानों पर वाहनों को जबरिया रोका गया।

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