छग को आर्थिक संकट की ओर ढकेलने की फिराक में मोदी सरकार, केन्द्र की अड़ंगेबाजी के बावजूद किसानों को मिला न्याय- विक्रम मण्डावी

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छग को आर्थिक संकट की ओर ढकेलने की फिराक में मोदी सरकार, केन्द्र की अड़ंगेबाजी के बावजूद किसानों को मिला न्याय- विक्रम मण्डावी

पंकज दाउद @ बीजापुर। केन्द्र की अड़ंगेबाजी के बावजूद छग के किसानों को राजीव गांधी न्याय योजना के जरिए उनके खातों में पैसे भेजे गए जबकि भाजपा पहले से ही ये अफवाह फैला रही थी कि छग सरकार के पास धनराशि की कमी है और किसानों को ठगा जा रहा है।

मोदी सरकार छग को आर्थिक संकट की ओर ढकेलने पर आमादा हो गई है। ये बातें बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक विक्रम शाह मण्डावी समेत अन्य कांग्रेसियों ने पत्रवार्ता में कही।

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कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसान न्याय योजना की चौथी किश्त जारी कर भूपेश सरकार ने ये साबित कर दिया कि कांग्रेस जो कहती है, वो करती है। भूपेश सरकार ने 21.50 लाख किसानों से करीब 91.50 लाख मेट्रिक टन धान खरीदकर एक रेकॉर्ड बनाया है। न्याय योजना के तहत एक एकड़ के पीछे किसानों को दस हजार रूपए की मदद दी जा रही है।

मोदी सरकार ने सेंट्रल पुल में 60 लाख टन चावल लेने की सहमति देने के बावजूद उसमें कटौती कर 24 लाख मेट्रिक टन कर दिया। केन्द्रीय मंत्री पियूष गोयल जहां न्याय योजना पर रोक लगाने की बात करते हैं तो इसी मसले पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमन सिंह व भाजपा विधायक दल के नेता धरमलाल कौशिक मौन हैं। मोदी सरकार ना तो चावल ले रही है और ना ही उससे एथेनॉल बनाने की अनुमति दे रही है।

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पत्रवार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष लालू राठौर, जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, सदस्य नीना रावतिया उद्दे, जनपद अध्यक्ष राधिका तेलम, विधायक प्रतिनिधि सुकदेव नाग, पालिका उपाध्यक्ष पुरूषोत्तम सल्लूर, बब्बू राठी, नगर अध्यक्ष संतोष गुप्ता, रमेश यालम एवं अन्य कांग्रसी मौजूद थे।

पलायन पर रोक लग रही

विधायक विक्रम मण्डावी ने कहा कि जिले से पहले से ही तेलंगाना मिर्च तोड़ने जाने का चलन था लेकिन अब ये कम हो रहा है। किसानों को दोहरी फसल लेने प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंचाई के साधन विकसित किए जा रहे हैं। तालाब, स्टॉप डैम एवं नहरों का निर्माण किया जा रहा है।

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इससे लोगों को रोजगार मिल रहा है और दोहरी फसल के लिए एक सुविधा भी। उन्होंने कहा कि दो साल में करीब 300 बोर किए गए। तालपेरू नदी के किनारे किसानों ने मिर्च लगाना शुरू कर दिया है। आईपेंटा सरीखे अंदरूनी इलाके के लोग भी दूसरी फसल के लिए प्रयास कर रहे हैं। किसानों को तार फेंसिंग की सुविधा दी जा रही है।