जनअदालत में ग्रामीण भड़के तो कमाण्डर मनीला बोली- ‘बेगुनाह को सजा देना नामुनासिब’… जानिए, आखिर किस शर्त पर छोड़े गए कोबरा कमाण्डो राकेश्वर मनहास ?

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इनसाइड स्टोरी: जनअदालत में ग्रामीण भड़के तो कमाण्डर मनीला बोली- ‘बेगुनाह को सजा देना नामुनासिब’… जानिए, आखिर किस शर्त पर छोड़े गए कोबरा कमाण्डो राकेश्वर मनहास ?

पंकज दाऊद @ बीजापुर। तर्रेम थाना क्षेत्र के तुम्मल गांव में गुरूवार की दोपहर कोबरा कमाण्डो राकेश्वर सिंह मिनहास को छोड़ने से पहले विश्लेषक किसी बड़ी नक्सली शर्त के बारे में कयास लगा रहे थे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

मिनहास को मुक्त करने से पहले लगे कंगारू कोर्ट में जब महिला कमाण्डर मनीला ने लोगों से उसे छोड़ने या ना छोड़ने के बारे में पूछा तो लोग भड़क गए और तब मनीला ने कहा कि ये तो दो माह से यहां तैनात हैं और इन्होंने इस इलाके में कोई अत्याचार नहीं किया है। किसी बेगुनाह को सजा देना नामुनासिब है।

तुम्मल गांव में शाम के 5 बज रहे थे, और करीब एक हजार ग्रामीण बैठे थे। 20 से 25 नक्सली सभा को घेरेे हुए थे। कंगारू कोर्ट में सीआरपीएफ जवान मिनहास के हाथ खोले गए और तभी महिला कमाण्डर मनीला और 6 नक्सली और पहुंचे।

मनीला ने उपस्थित ग्रामीणों से पूछा कि कमाण्डो को छोड़ दिया जाए या मार दिया जाए। तब लोग कहने लगे कि गांव में आकर जवान अत्याचार करते हैं और बेकसूर लोगों को पकड़कर ले जाते हैं। वे कोई मुरव्वत नहीं करते हैं। ऐसे में कमाण्डो राकेश्वर मिनहास को भी सजा दी जानी चाहिए।

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– ग्रामीणों के सामने बंधक जवान

इस पर महिला कमाण्डर ने कहा कि राकेश्वर निर्दोष है और उनकी पोस्टिंग दो माह पहले ही हुई है। उन्होंने इस क्षेत्र में कोई अत्याचार नहीं किया है और इस वजह से उन्हें छोड़ देना मुनासिब होगा। ।

ऐसे पहुंचे वार्ताकार

गुरूवार को आवापल्ली से बड़ी वाहन से तर्रेम तक वार्ताकारों को ले जाया गया। इन वार्ताकारों में माता रूक्मिणी सेवा संस्थान के संस्थापक पदमश्री धर्मपाल सैनी, उनके सहयोगी, जिला गोण्डवाना समाज के अध्यक्ष रिटायर्ड शिक्षक तेलम बोरैया एवं गोण्डवाना समाज की जिला उपाध्यक्ष सुकमती अपका शामिल थे। तर्रेम से बाइक से सभी वार्ताकार पत्रकारों के साथ तुम्मल गांव की ओर रवाना हुए।

मछली-भात खाने से पहले क्या हुआ

इस दौरान गांव में कोई नहीं था। लेकिन धीरे-धीरे लोगों का आना शुरू हुआ। जब लोग आने लगे तो वर्दीधारी 20 से 25 नक्सली भी वहां पहुंचे। करीब एक हजार लोग आसपास के गांवों से एकत्र हो गए। इस बीच दोपहर के एक बज गए। तब नक्सलियों ने वार्ताकारों और पत्रकारों को मछली, चटनी और भात परोसा।

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भोजन के बाद जैसे ही वार्ताकार उठकर खटिए पर बैठे तभी एक मैसेन्जर आया और कहा कि तेलम बोरैया को बुलाया जा रहा है। तब तेलम बोरैया ने कहा कि मेरे साथ सुकमती अपका भी आएंगी। इस पर मैसेंजर राजी हो गया। मैसेंजर के साथ एक ही बाइक पर तेलम बोरैया और सुकमती बैठ गए।

– जवान की रिहाई में वार्ताकारों की अहम भूमिका रही

संदेश वाहक उन्हें एक किमी दूर ले गया जहां पहले से 3 पुरूष व 4 महिला नक्सली मौजूद थे। यहां से वार्ता शुरू हुई। वहां नक्सली मनीला अपने संगठन की ओर से बात कर रही थीं। उसने कहा कि संगठन राकेश्वर को छोड़ने के लिए तैयार है लेकिन जवान गांवों में जाकर लूटपाट करते हैं और बेगुनाहों से मारपीट करते हैं। संगठन को ये बात पसंद नहीं है।

जवान की सुरक्षा की गारंटी मांगी

महिला नक्सली कमांडर ने कहा कि बेकसूरों को जेल में डाला जा रहा है। ये गलत है। फिर मनीला ने कहा कि वे इस बात की गारंटी चाहते हैं कि कमाण्डो राकेश्वर अपने घर तक सुरक्षित पहुंच जाएं। उन्हें पुलिस पर यकीन नहीं है। जवान को रास्ते में किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। जब वे घर पहुंचे तो इसका प्रमाण भी होना चाहिए।

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– जवान के हाथ की रस्सी खोलते नक्सली

तब तेलम बोरैया ने कहा कि मैं इसकी गारंटी लेता हूं और किसी माध्यम से इसकी जानकारी दे दूंगा। बोरैया के मुताबिक बस ये ही दो शर्तें रखी थी नक्सलियों ने। कोई बड़ी शर्त की बात नहीं की।

ऐसी बनी बात

नक्सलियों ने राकेश्वर को मुक्त करने से पहले वार्ताकारों को भेजने की पेशकश की थी। इस पर पदमश्री धर्मपाल सैनी और उनके सहयोगी के नाम को वार्ताकार के तौर पर भेजा गया। इस पर नक्सलियों ने स्थानीय व्यक्ति को भी वार्ताकार बनाने की पेशकश की।

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इस पर तेलम बोरैया का नाम भेजा गया। तेलम बोरैया के कहने पर जिला गोण्डवाना समाज की उपाध्यक्ष सुकमती अपका को भी वार्ताकारों में शामिल कर लिया गया। बता दें कि तेलम बोरैया किसी भी राजनैतिक दल से तालुक्कात नहीं रखते हैं।