नक्सल प्रभावित इलाकों के युवाओं को CRPF दे रही ड्राइविंग की ट्रेनिंग, विरोधी विचारधारा के खात्मे का एक तरीका ये भी

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नक्सल प्रभावित इलाकों के युवाओं को CRPF दे रही ड्राइविंग की ट्रेनिंग, विरोधी विचारधारा के खात्मे का एक तरीका ये भी

पंकज दाऊद @ बीजापुर। धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में पसरे विरोधी विचारधारा के खात्मे के लिए सीआरपीएफ की 85 बटालियन ने युवाओं को रोजगार से जोड़ने और गांव में तरक्की का बीज बोने के लिए ड्राइविंग की ट्रेनिंग देना शुरू किया है।

सीआरपीएफ के अफसरों का मानना है कि इस कठिन क्षेत्र के युवा जब गांव से बाहर निकल दीगर शहरों के विकास को जानेंगे तो वे इसे अपने गांव के विकास के लिए भी सोच सकेंगे।

यहां कलेक्टर रितेश अग्रवाल, डीआईजी कोमल सिंह, 85 बटालियन के सीओ यादवेंन्द्र सिंह यादव एवं टूआईसी हरविंदर सिंह की मौजूदगी में ड्राइविंग ट्रेनिंग की शुरूवात गंगालूर रोड स्थित परिवर्तन कैम्प में हुई।

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इस मौके पर कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने कहा कि प्रशिक्षण में आए युवा अपने गांव के लिए चेंजिंग एजेंट की मानिंद हो सकते हैं। वे गांव की समस्या को सीधे प्रशासन को बता सकते हैं और सरकारी योजनाओं को गांव तक ले जा सकते हैं।

यहां आए 40 युवा यदि इसी बात को गांव के दस लोगों को बताएं तो ये संख्या चार सौ हो जाएगी। इससे गांव के विकास में तेजी आएगी। इस कठिन क्षेत्र में इस तरीके से भी शांति स्थापना में मदद मिलेेगी। रेड्डी गांव में नाले में अच्छा पानी रहता है लेकिन किसान इसका उपयोग दूसरी फसल के लिए नहीं लेते हैं। इस प्रवृत्ति को भी बदलना होगा।

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कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने कहा कि ड्राइविंग सीखकर जब दूसरे शहरों में जाएंगे तो वहां तरक्की के पैटर्न को देखेंगे और गांव का विकास कर सकेंगे। इस मौके पर डीआईजी कोमल सिंह ने कहा कि प्रशासन और पुलिस विकास के लिए समर्पित है। अपनी समस्याएं कलेक्टर को बताएं।

कुछ कारणों से इस इलाके में संसाधनों कमी रह गई है। इसे दूर करने में सीआरपीएफ की 85 बटालियन प्रयासरत है। पिछले साल गंगालूर एवं बासागुड़ा में महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया। उसूर में राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेने के बाद युवा खुद अपनी गाड़ी ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के बहकावे में युवा ना आएं। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें।

तीस दिनों का प्रशिक्षण

परिवर्तन कैम्प में 40 युवाओं को एक माह का ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान कैम्प में ही उनके रहने व खाने की सुविधा होगी। दो नवंबर से इस प्रशिक्षण की शुरूवात हुई।

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