पहले से ही टारगेट में था डीआरजी जवान मल्लेश‚ लोकल मिलिशिया ने कर दी हत्या… सरपंच की भूमिका संदिग्ध, फोर्स के आने से पहले ही अंतिम संस्कार

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पहले से ही टारगेट में था डीआरजी जवान मल्लेश‚ लोकल मिलिशिया ने कर दी हत्या… सरपंच की भूमिका संदिग्ध, फोर्स के आने से पहले ही अंतिम संस्कार

पंकज दाऊद @ बीजापुर। नक्सलियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी के लोकल मिलिशिया ने डीआरजी जवान और सरेण्डर नक्सली समड़ूराम पोयाम उर्फ मल्लेश (38) की कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दी।

– मृतक की पत्नी भीमे

नक्सलियों ने घटना को उस वक्त अंजाम दिया जब डीआरजी जवान जिला मुख्यालय से अपने गांव कोतरापाल गया हुआ था। घटना के बाद लोकल मिलिशिया के दबाव में गांव के लोगों ने एकराय होकर शव का अंतिम संस्कार फोर्स के आने से पहले ही गुरूवार की शाम को ही कर दिया।

सूत्रों के मुताबिक मल्लेश भैरमगढ़ एरिया कमेटी में नक्सली था और 2015 में उसने समर्पण कर दिया। फिर वह पुलिस में भर्ती हो गया। वह पुराने पुलिस लाइन में डीआरजी में पदस्थ था।

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बताया गया है कि गुरूवार को वह सुबह करीब साढ़े 9 बजे जिला मुख्यालय से बाइक से निकला था। दोपहर करीब 12 बजे वह जब गांव पहुंचा, तो वहां तालाब की मेड़ का काम चल रहा था। वहां काफी लोग मौजूद थे।

– शोकाकुल परिवार

इसके पहले की वह घर जाता, लोकल मिलिशिया ने उसे पकड़ लिया। वहां नक्सलियों ने कुल्हाड़ी से धारदार हथियार से वार कर उसकी हत्या कर दी। जांगला टीआई आरएन गौतम ने बताया कि मल्लेश पहले से ही नक्सलियों के टारगेट में था। जब वह गांव आया तो उसे नक्सलियों ने पकड़ लिया।

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सरपंच की भूमिका संदिग्धǃ

पुलिस की मानें तो इस मामले में सरपंच आयतू मोड़ियामी की भूमिका संदिग्ध है क्याेंकि वह अंतिम संस्कार में मौजूद था लेकिन हत्या की खबर ना तो सरपंच ने दी और ना ही उप सरपंच ने। एकराय होकर शव को जलाकर साक्ष्य मिटा दिया गया।

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कई बार फोन भी सरपंच को किया गया लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। इस हत्या के पीछे लोकल मिलिशिया लीडर मंकेश और लक्ष्मण मुल्ला का नाम सामने आ रहा है।

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बाइक ले गए, गांव में सन्नाटा

सुबह तड़के फोर्स जब कोतरापाल पहुंची, तो गांव में कोई नहीं था। सभी के घर बंद थे। केवल मल्लेश का परिवार ही घर पर था। कोतरापाल बड़ा गांव है और इसमें सात से आठ टोले हैं।

बताया गया है कि हत्या उसके घर से करीब एक किमी दूर की गई। उसकी स्प्लेण्डर बाइक भी नक्सली ले गए। जब वारदात हुई तो पत्नी भीमे खेत गई थी और तीनों लड़के खेलने गए थे।

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