बाजार में अब मशरूम खरीदने की लगी होड़, किसानों को लुभाने लगा है ये जादुई कारोबार

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बाजार में अब मशरूम खरीदने की लगी होड़, किसानों को लुभाने लगा है ये जादुई कारोबार

पंकज दाउद @ बीजापुर। जिले में हालिया सालों में किसानों को मशरूम उत्पादन का धंधा बड़ी तेजी से लुभाने लगा है क्योंकि इसकी मार्केटिंग के लिए उन्हें भटकना नहीं पड़ रहा है। हाथों हाथ उनके लगाए मशरूम बाजार में दो सौ रूपए किलो के रेट में बिकने लगे हैं। अब तो उत्पादन से ज्यादा डिमाण्ड आने लगी है।

महिला स्वसहायता समूह और किसान अभी इसका उत्पादन कर रहे हैं। इसके अलावा अब गोठानों में भी इसका उत्पादन शुरू किया जा रहा है। जिला खनिज निधि की आर्थिक मदद से कृषि विज्ञान केन्द्र इसके लिए किसानों और सहायता समूहों को प्रशिक्षण दे रहा है।

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वैज्ञानिक एवं प्रभारी अरविंद ओयाम ने बताया कि फाॅरेस्ट कालोनी एवं पापनपाल में महिला स्व सहायता समूह इसका उत्पादन कर रहे हैं। मेन रोड निवासी प्रफुल्ल कुजूर एवं कोत्तापाल में अशोक लिंगम इसकी खेती कर रहे हैं। किसान बताते हैं कि उन्हें मार्केटिंग के लिए भटकना नहीं पड़ता है और लोग मार्केंट में तुरंत इसे खरीद लेते हैं। कई ऐसे लोग भी हैं जो सीधे उनके घरों में आकर इसे लेकर जाते हैं।

40 का खर्च और 1200 की कमाई

वैज्ञानिक अरविंद आयाम बताते हैं कि केवीके किसानों को तीस रूपए में एक पाव बीज देता है। इसके उत्पादन के लिए पाॅलीथिन एवं पैरा ही लगता है। फार्मलिन मुफ्त में केवीके की ओर से दिया जाता है।

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नवंबर में धान कटाई के बाद पैरा हर किसान के पास उपलब्ध है। इसमें बीच-बीच में पानी का छिड़काव किया जाता है। अरविंद आयाम ने बताया कि 25 दिनों में उत्पादन शुरू हो जाता है।

एक पाव बीज से छह पैकेट बनाए जाते हैं और हर पैकेट से चार तोड़ाई में करीब एक किलो मशरूम निकल आता है। पच्चीस दिनों में एक पाव बीज से किसान एक हजार से बारह सौ रूपए तक के मशरूम का उत्पादन कर लेता है।

गोठानों में भी

बताया गया है कि अब दो फरवरी से गोठान के स्व सहायता समूहों को भी इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये एक पार्ट टाइम जाॅब है और इसमे पूरा समय लगाने की जरूरत नहीं है।

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वैज्ञानिक अरविंद आयाम ने बताया कि प्रफुल्ल कुजूर कभी एक दिन में तीन तो कभी छह किलो उत्पादन कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि केवीके के पास ड्रायर मौजूद है लेकिन ज्यादा उत्पादन होने की सूरत में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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