बीजापुर में नक्सलियों का खूनी खेल, पुलिस मुखबिरी के शक में 4 निर्दोष ग्रामीणों की हत्या… पहले बनाया था बंधक, फिर उतार दिया मौत के घाट

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बीजापुर में नक्सलियों का खूनी खेल, पुलिस मुखबिरी के शक में 4 निर्दोष ग्रामीणों की हत्या… पहले बनाया था बंधक, फिर उतार दिया मौत के घाट

पंकज दाऊद @ बीजापुर। यहां से 30 किमी दूर गंगालूर थाना क्षेत्र के पीड़िया गांव में नक्सलियों ने तीन दिन पहले अगवा किए गए 4 ग्रामीणों की हत्या कर दी। जिले में लगातार हो रही नक्सली घटनाओं से दहशत का माहौल बन गया है।

इसके एक सप्ताह पहले डोडी तुमनार में नक्सलियों ने तीन अन्य ग्रामीणों की भी हत्या की। इनके शवों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया और फिर इसे उनके गांवों में दफन कर दिया गया है। हालांकि, पुलिस ने इन वारदातों की अधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को सशस्त्र नक्सली गांव में आ धमके थे और पांच लोगों को बंधक बनाकर अपने साथ ले गए। इनमें से सावनार के कुरसमपारा निवासी संदीप कुरसम (25) एवं हेमलापारा निवासी रामा हेमला (35) एवं डोडीतुमनार के अलावा पीड़िया के एक-एक ग्रामीण की हत्या कर दी।

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Former assistant constable murdered in Bijapur

इस बारे में बस्तर आईजी सुंदरराज पी. का कहना है कि ग्रामीणों की हत्या की जानकारी मीडिया के हवाले से सामने आ रही है। अभी संबंधित इलाके के ग्रामीणों द्वारा इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी गई है। पुलिस अपने स्तर पर जानकारी जुटा रही है।

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सूत्रों की मानें तो एक सप्ताह पहले नक्सलियों ने डोडी तुमनार के 3 ग्रामीणों की हत्या भी पुलिस मुखबिरी के शक में की। मृतकों के परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी। इससे बात का खुलासा नहीं हो पा रहा है। परिजन दहशत के कारण गांव से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। वहीं जानकारी पुष्ट नहीं होने से पुलिस भी आधिकारिक बयान जारी नहीं कर रही है।

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साप्ताहिक हाट से रौनक गायब

गंगालूर में मंगलवार को साप्ताहिक हाट था लेकिन सावनार, कोरचोली, नेण्ड्रा एवं तोड़का गांवों से कोई भी खरीदारी के लिए नहीं आया। इस वारदात से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। बताया गया है कि ये नक्सलियों की मौजूदगी के कारण बेहद ही खतरनाक इलाका माना जाता है।

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बताते हैं कि इस इलाके में नक्सलियों की गहरी पैठ है। फिलहाल सावनार पंचायत की सरपंच संगीता ताती हैं। पांच साल पहले तोड़का में उनके ससुर सोमलू ताती की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। नक्सली दहशत के कारण उनका परिवार जिला मुख्यालय में रहता है।

एक माह में 15 मर्डर

नक्सलियों ने जिले में अचानक अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं और जवानों के अलावा आम ग्रामीणों को अपना निशाना बना रहे हैं। वे ग्रामीणों पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर उन्हें मार देते हैं। इसके पहले गंगालूर थाना क्षेत्र के ही पुसनार और मेटापाल के चार ग्रामीणों की नक्सलियों ने हत्या कर दी।

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एक दिन पहले ही बासागुड़ा थाना क्षेत्र के पुतकेल गांव में नक्सलियों ने कहर बरपाते एक किसान दासर रमन्ना की हत्या कर दी। इसके पहले नक्सली कुटरू इलाके में एक एएसआई एवं एक सहायक आरक्षक हत्या कर चुके हैं। इससे एक दिन पहले भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के चिहका में नक्सलियों ने एक बर्खास्त सहायक आरक्षक की हत्या की थी।

युवक के शव के पास नक्सली पर्चा भी मिला है। जिसमें जगरगुंडा एरिया कमेटी ने मृतक को पुलिस का गोपनीय सैनिक बताते पीएलजीए द्वारा मौत की सजा दिए जाने का जिक्र किया है। पर्चे में कहा गया है कि गांव के नौजवान ऐसी गलती करने से बचें, अन्यथा जगरगुंडा शिविर में भागना पड़ेगा।

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