एड़समेटा काण्ड की जांच करने CBI टीम 15 किमी पैदल चलकर पहुंची… घायलों व मृतकों के परिजनों से की बात, मीडिया से बनाई दूरी… फोटोग्राफी पर भी रही पाबंदी

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पंकज दाऊद @ बीजापुर। यहां से करीब तीस किमी दूर गंगालूर थाना क्षेत्र के एड़समेटा में हुई कथित मुठभेड़ की जांच करने सीबीआई की टीम शुक्रवार को पैदल पहुंची और बयान लिए। इस कार्यवाही से मीडियाकर्मियों को दूर रखा गया और फोटो के अलावा वीडियोग्राफी पर भी पाबंदी लगा दी गई।

कड़ी सुरक्षा में सीबीआई अफसर सारिका जैन की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम जिला मुख्यालय से दोपहर गंगालूर पहुंची और फिर यहां से सात किमी दूर दो पहाड़ियों के अलावा तीन पहाड़ी नालों को पार कर शाम करीब चार बजे पहुंची।

सीबीआई अफसरों ने पहले ही मीडियाकर्मियों को बता दिया था कि वे इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं देंगे। एड़समेटा में उन्होंने पत्रकारों को फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने से मना कर दिया।

सुबह से ही गांव के लोग गांव से करीब एक किमी गुड़ी (देवस्थल) के समीप घटनास्थल पर एकत्र हो गए थे। मौसम साफ था इसलिए किसी को ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। सीबीआई की टीम बुधवार की रात को ही जिला मुख्यालय आ गई थी। गुरूवार को इस टीम ने जिला मुख्यालय में अफसरों से चर्चा की।

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शुक्रवार को सीबीआई के अफसर गंगालूर थाने गए और वहां केस से जुड़े मामलों को देखा।

CBI की टीम मृतक सोनू की रिश्तेदार पूनेम सनकी, मृतक कारम पदेगा एवं मृतक उवके छोटे भाई कारम बदरू के रिष्तेदार बण्डी कारम, मृतक पाण्डू के पुत्र कारम कमलू, मृतक मासा कारम की मां कारम सोमली, मृतक बुधराम की पत्नी सोमली कारम,घायल कारम छोटू , पूनेम सोमलू, कारम आयतू एवं कारम सन्नू के अलावा कुछ और लोगों के बयान दर्ज किया जा रहे हैं। सीबीआई की टीम शुक्रवार की देर शाम तक गंगालूर नहीं पहुंची थी।

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ये है मामला :

17 मई 2013 को सर्चिंग के दौरान एड़समेटा में सुरक्षाबलों और नक्सलियों की कथित मुठभेड़ हुई थी। इसमें तीन नाबालिग समेत आठ लोगों की मौत हुई थी। इसमें तब ग्रामीणों ने कहा था कि वे बीज पण्डुम मनाने देवस्थल में जमा हुए थे जबकि फोर्स का कहना कि यहां नक्सलियों ने पुलिस पर हमला किया था।

इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। फिर याची डिग्रीप्रसाद, हाईकोर्ट के वकील किशोर नारायण एवं आप नेत्री सोनी सोढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की सीबीआई जांच की गुहार लगाई थी।