माओवाद का दामन छोड़ मेन स्ट्रीम में शामिल हुए 4 नक्सली… कई बड़ी वारदातों में शामिल रहे दो नक्सलियों पर था 11 लाख का इनाम… रास नहीं आया नक्सलवाद

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पंकज दाऊद @ बीजापुर। जिले के अलावा सुकमा और दंतेवाड़ा में बड़ी वारदातों में मुख्य भूमिका निभाने वाले चार माओवादी यहां सोमवार की सुबह सीआरपीएफ के डीआईजी कोमल सिंह, एसपी दिव्यांग पटेल एवं 85 बटालियन के कमाण्डेंट यादवेन्द्र सिंह यादव के सामने सरेण्डर कर देश की मेन स्ट्रीम से जुड़ गए। इन्हें दस-दस हजार रूपए की प्रोत्साहन राषि तत्काल दे दी गई।

सरेण्डर करने वाले नक्सलियों में राकेश उईका उर्फ बिल्लू उईका (26) निवासी पोंजेर पटेलपार थाना गंगालूर पर आठ लाख रूपए का इनाम था जबकि कक्केम सुक्कू उर्फ सुखलाल (32) निवासी एड़समेटा थाना मिरतूर पर तीन लाख रूपए का इनाम घोषित था। वहीं बुधरू मोड़ियाम (30) निवासी नदीपारा चेरकंटी थाना बीजापुर और सोमारी कड़ती (32) निवासी एड़समेटा थाना मिरतूर ने भी पुलिस अफसरों के सामने सोमवार को समर्पण किया।

ये सभी बड़ी वारदातों में शामिल थे। डीआईजी कोमल सिंह एवं एसपी दिव्यांग पटेल ने बताया कि राकेश उईका पीएलजीए बटालियन एक के कंपनी नंबर एक का दक्षिण बस्तर डिविजन का सेक्शन कमाण्डर था।

एसएलआर और एलएमजी रखने वाला राकेश दरभा डिविजन में सक्रिय था। पष्चिम बस्तर स्माॅल एक्शन टीम कमाण्डर मनीष एवं गंगालूर एलओएस कमाण्डर दिनेष ने 2010 में उसकी भर्ती कंपनी मेंबर के तौर पर की। तब से अब तक वह पीएलजीए बटालियन एक में सेक्षन कमाण्डर के तौर पर काम कर रहा था।

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इन वारदातों में रही संलिप्तता

सुकमा जिले के तिम्मापुर जगरगुण्डा में 2011 में कोया कमाण्डों के आठ जवानों की हत्या, भेज्जी में सीआरपीएफ के गष्ती दल के चार जवानों की हत्या, 2013 में चिंतागुफा में हेलीकाॅप्टर पर फायरिंग, मिनपा कैम्प में हमला कर सीआरपीएफ के तीन जवानों की हत्या, 2014 में कसालपाड़ में सीआरपीएफ के चार जवानों की हत्या एवं हथियारों की लूट, बुरकापाल हमला, 2015 में पीडमेल में एसटीएफ के आठ जवानों की हत्या, 2016 में पोगटपल्ली में सीआरपीएफ के जवानों पर फायरिंग, 2017 में भेज्जी इलाके के कोत्ताचेरू एवं गोरखा के बीच घात लगाकर सीआरपीएफ और डीएफ के बारह जवानों की हत्या एवं तोण्डामरका एनकाउण्टर में डीआरजी के तीन जवानों की हत्या में राकेष उईका शामिल था।

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बुधरू मोड़ियाम गंगालूर एरिया कमेटी में जनमिलिषिया कमाण्डर एवं सप्लाई टीम का मेंबर था। बारह बोर की बंदूक लेकर चलने वाले बुधरू को 2001 में डीवीसी मेंबर हरिराम ने संगठन में भर्ती किया था। उसने गंगालूर एरिया में चार साल तक डीवीसी गोपी के साथ काम किया। वह सप्लाई टीम का मेंबर अब तक था।

कमाण्डर से नहीं बनीं तो नक्सलपंथ छोड़ रचाया ब्याह

कक्केम सुक्कू उर्फ सुखलाल भैरमगढ़ एरिया कमेटी में प्लाटून नंबर 13 का सेक्षन डिप्टी कमाण्डर था। एसएलआर रखने वाला सुक्कू पष्चिम बस्तर डिविजन में काम कर रहा था। उसे 2003 में एसीएम संतोष ने संगठन में ष्षामिल किया। उसने दिसंबर 2003 में 13 दिनों तक ट्रेनिंग ली।

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2004 से 2005 जुलाई तक उसने माटवाड़ा एलओएस मेम्बर के तौर पर काम किया। उसके बाद उसे 2006 से 2019 तक गंगालूर क्षेत्र में पे्रस टीम कमाण्डर बनाकर भेजा गया। उसने गणेष उईके के साथ तीन साल तक प्रेस टीम में काम किया। 2009 से जून 2010 तक उसे पीपीसी के तौर पर भैरमगढ़ एरिया कमेटी में भेजा गया। 2010 से जुलाई 2019 तक उसने स्कूल में षिक्षक के रूप में रखा गया।

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इस बीच उसकी कमाण्डर वेल्ला से नहीं बनी तो उसने नक्सलपंथ से तौबा कर लिया और गंगालूर एलओएस मेम्बर सोमारी कड़ती से ब्याह रचाकर घर बसा लिया। सोमारी कड़ती ने भी सोमवार को सरेण्डर किया। सोमारी को 2006 में डीवीसी संतोष ने संगठन में भर्ती किया था। 2006 से 2012 तक वह गंगालूर एलओएस सदस्य थी। 2013 से 2019 तक वह नक्सली स्कूल में थी।

डीआरजी के साथ अच्छा तालमेल

सीआरपीएफ डीआईजी कोमल सिंह ने कहा कि उनकी फोर्स और डीआरजी के जवानों में अच्छा तालमेल है और ये एक ही टीम हैं। समर्पण के बारे में उन्हांेने कहा कि ये जिला बल और सीआरपीएफ के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। चार युवाओं ने देशद्रोह की विचारधारा छोड़कर आज मुख्यधारा में मिल हुए हैं।


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