खेत के मेड़ में ठहरे पानी से बुझ रही ग्रामीणों की प्यास ! विकास से कोसों दूर है यह गांव… आजादी के 7 दशक बाद गांव में एक भी हैण्डपंप नहीं, ना ही पहुंची सरकार की कोई योजना !

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आजादी के 70 बरस बाद भी बस्तर के अंदरूनी इलाकों में बसे कई गांव ऐसे हैं, जहां विकास की किरणें अभी भी नहीं पहुंची है। आज हम आपको ऐसे ही इलाके में गुजर बसर कर रहे लोगों से रूबरू कराने जा रहे हैं जिन्हें शुद्ध पेयजल भी मयस्सर नहीं है। हमारे संवाददाता के. शंकर ने दुर्गम इलाके में पहुंच ग्रामीणों की समस्याओं को जाना और इसे आप तक पहुंचा रहे हैं।

के. शंकर @ सुकमा। देश को आजाद हुए 7 दशकों से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन बस्तर में आदिवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। जगरगुंडा इलाके के अतिनक्सल प्रभावित क्षेत्र गुमोड़ी पंचायत के छोटे हिड़मा गांव के बाशिंदों को अपनी प्यास बुझाने काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है।

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ख़बर बस्तर डॉट इन की टीम ने जब इस गांव का दौरा किया तो ग्रामीण पानी के लिए दिक्कतें उठाते नजर आए। यहां पहुंचना भी इतना आसान नहीं था। तमात कठिनाईयों को पार कर जब हम मौके पर पहुंचे तो हमने देखा कि इस गांव में एक भी हैंडपंप नहीं है।

इस गांव में तकरीबन 100 लोगों की आबादी बसती है लेकिन यहाँ एक भी हैण्डपंप या शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसकी वजह से ग्रामीण खेत के मेड़ में ठहरे हुए पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीण इसी पानी का इस्तेमाल दैनिक जरूरतों के लिए भी करते हैं।

सरकार के दावे खोखले

ग्रामीणों की मानें तो सरकारी तंत्र का कोई भी नुमाइंदा आज तक इस गांव में नहीं पहुंचा। अधिकारी, कर्मचारी की बात तो दूर, यहां सरपंच व सचिव भी नहीं पहुंचते। ऐसे में गुमोड़ी पंचायत के छोटे हिड़मा गॉव के ग्रामीण सरकार के तमाम योजनाओं से वंचित हैं। सरकार के दावों के बावजूद विकास से कोसो दूर है यह इलाका।

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इस गांव तक पहुंचने के लिए न कोई सड़कें हैं न ही पुल-पुलिये। गांव में किसी भी ग्रामीण की तबियत खराब हो तो मीलों सफर पैदल तय कर उपचार के लिए जाना पड़ता है। गांव में कोई मितानिन या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक मौजूद नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को अक्सर छोटी बड़ी कई समस्याओं से दो चार होना पड़ता है।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाएं पहुंचाने का दावा तो सरकारें करती है लेकिन छोटे हिड़मा जैसे बस्तर के गांवों में इन दावों की हवा निकलती दिखती है।

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दरअसल, बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे इस गांव में रहने वाले ग्रामीणों के पास सवाल बहुत हैं मगर शिकायत करें भी तो किससे। इन सवालों के बीच ग्रामीणों की जिंदगी ठहर सी गई है। विकास की चिड़िया कभी इस गांव की तरफ आएगी भी या नहीं यह एक बड़ा सवाल है ?

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