स्याह अँधेरे जंगल में रूकी फोर्स और बरामद किए आईईडी बनाने के उपकरण… कातिलाना खतरों के बीच धुर नक्सली गांवों में लोगों की मदद भी की

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स्याह अँधेरे जंगल में रूकी फोर्स और बरामद किए आईईडी बनाने के उपकरण… कातिलाना खतरों के बीच धुर नक्सली गांवों में लोगों की मदद भी की

पंकज दाऊद @ बीजापुर। सीआरपीएफ की 229 बटालियन के जवानों ने उसूर ब्लाॅक के धुर नक्सल प्रभावित छह गांवों में दो दिनों तक सर्चिंग की और एक रात तो पहाड़ी में स्याह अंधेरे जंगल में गुजारी। अगले दिन फोर्स ने इशुलनार और कोकरा गांवों कें बीच जंगल से आईईडी बनाने के उपकरणों के अलावा कई सामान बरामद किए।

सूत्रों के मुताबिक सीआरपीएफ की 229 बटालियन के कमाण्डेंट विवेक भण्डराल के निर्देश पर आवापल्ली एवं चेरामंगी कैम्प से डिप्टी कमाण्डेंट पेम माकन, सहायक कमाण्डेंट लवकुश कुमार कनौजिया, सहायक कमाण्डेंट गौरव सिंह, इंस्पेक्टर हनुमान, इंस्पेक्टर धर्मेन्द्र दुबे एवं अफसर एवं जवान 21 जनवरी की दोपहर धुर नक्सल प्रभावित गांव पुन्नूर, इशुलनार, कोकरा, गुट्टुम, नेण्ड्रा एवं सुरनार इलाके की सर्चिंग की।

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गांव में जवानों ने लोगों से मुलाकात की और बीमार बुजूर्ग व बच्चों को दवाएं दीं। लोगों से उनकी परेशानियों के बारे में भी मालूमात किए गए। इसके बाद फोर्स वहां से निकल गई और पहाड़ियों की ओर सर्चिंग में चली गई।

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जवानों ने स्याह अंधेरे में घनघोर जंगल और पहाड़ी में रात काटी। सुबह फोर्स फिर इन गांवों की ओर निकली। तब कोकरा एवं इषुलनार के बीच जंगल में नक्सली सामान मिले। यहां आईईडी बनाने के सामान, नक्सली साहित्य एवं रोजमर्रा की वस्तुएं मिलीं।

फोर्स ने इसे बरामद कर लिया। बताया गया है कि एक गांव के समीप तीन नक्सली स्मारक भी दिखे। जवान 22 जनवरी को सुरक्षित कैम्प लौट आए।

पटाखे फूट रहे थे और फोर्स बढ़ रही थी

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जब इन गांवों की ओर फोर्स जा रही थी तो नक्सलियों के समर्थक पटाखे फोड़ रहे थे। ये फोर्स के स्वागत में नहीं बल्कि आसपास मौजूद नक्सलियों को अलर्ट करने के लिए फोड़े जा रहे थे। अफसर बताते हैं कि जब भी ऑपरेशन चलता है तो नक्सलियों के सिंपेथाइसजर ऐसा करते हैं ताकि नक्सली इलाके से भाग जाएं।

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