मोदी और भूपेश सरकारें बस्तर को लूटने में लगीं… जेसीसी ने शुरू किया धान सत्याग्रह, एक दिनी दिया धरना

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मोदी और भूपेश सरकारें बस्तर को लूटने में लगीं… जेसीसी ने शुरू किया धान सत्याग्रह, एक दिनी दिया धरना

पंकज दाउद @ बीजापुर। बस्तर संयुक्त मोर्चा के संभागीय संयोजक नवनीत चांद ने कहा है कि मोदी और भूपेश सरकार बस्तर की नैसर्गिग संपदा का दोहन कर रही हैं और बस्तरियों को कुछ नहीं मिल रहा है। 

वे यहां जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की ओर से भूपेश सरकार की वादाखिलाफी के आरोपों को ले एक दिनी धरने को संबोधिेत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एनमएमडीसी की लौह अयस्क खदानों की लीज बढ़ा दी गई है। अरबों की कमाई करने वाली एनएमडीसी ने बस्तर के लिए कुछ नहीं किया। 

चारामा से कोंटा तक एनएमडीसी को मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना था लेकिन केन्द्र और राज्य सरकारें आखिर किस दबाव में धनराशि इनसे नहीं ले पा रही हैं, ये समझ से परे है।

नवनीत चांद ने कहा कि जब तक किसान का एक एक दाना धान नहीं खरीदा जाएगा, तब तक धान सत्याग्रह चलता रहेगा। इस धरने में जेसीसी जिलाध्यक्ष सकनी चंद्रैया, जमुना सकनी, रामचंद्रम एरोला, दीपक मरकाम, चलमैया अंगनपल्ली, सुनीता तिवारी, धासीराम, सीताराम, अंजलि तेलम एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन रोशन झाड़ी ने किया।

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सीएम कुर्सी का ढाई साल का फार्मूला

संयुक्त मोर्चा के संयोजक ने कहा कि कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहूल गांधी ने कहा था कि 10 दिनों में कांग्रेस सरकार वादा पूरा नहीं करेगी तो सीएम को बदल दिया जाएगा। नवनीत चांद ने चुटकी लेते कहा कि कांग्रेस का घोषणापत्र जेसीसी के मेनीफैस्टो की नकल है लेकिन सरकार चलाने के लिए नकल के साथ अकल भी चाहिए। ये मेनीफैस्टो स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने तैयार किया है। अब ये भी चर्चा है कि सीएम की कुर्सी के लिए ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर विचार हो रहा है।

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निर्दोष आदिवासियों की रिहाई पर चुप्पी- सकनी

जेसीसी जिलाध्यक्ष सकनी चंद्रैया ने आरोप लगाया कि भूपेश सरकार ने जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के लिए दो साल में कुछ नहीं किया। इस मामले में वे मौन हैं। अनियमित कर्मियों को नियमित किए जाने के वादे पर अमल नहीं हो रहा है। 

इधर, शराबबंदी की बात को सत्तासीन हुई कांग्रेस अब खुद शराब बेच रही है। गली कूचों में कोचिए सक्रिय हैं। इसमें भी ज्यादा दर पर शराब बेची जा रही है। ना तो बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिला और ना ही बेरोजगारी भत्ता। सरकार हर मोर्चे पर नाकामयाब रही है।

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