6 माह में अपने पैरों पर खड़ी हुईं 100 युवतियां, सिलाई प्रशिक्षण में आईं अंदरूनी इलाकों से महिलाएं

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6 माह में अपने पैरों पर खड़ी हुईं 100 युवतियां, सिलाई प्रशिक्षण में आईं अंदरूनी इलाकों से महिलाएं

पंकज दाउद @ बीजापुर। आजीविका मिशन की ओर से गंगालूर में दी जा रही सिलाई की ट्रेनिंग 6 माह में 100 महिलाओं ने पूरी कर ली है और वे प्रशासन की ओर से मशीन मिलने पर अपने ही गांव में सिलाई कर आमदनी कर सकेंगी।

– आजीविका मिशन के ट्रेनिंग प्रोग्राम में पहुंचे सीआरपीएफ अफसर।

ट्रेनर महादेवी ने बताया कि 50-50 के बैच में तीन-तीन माह की ट्रेनिंग दी गई। 28 जनवरी को दूसरे बैच की ट्रेनिंग का समापन हुआ। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण में स्कूल ड्रेस, स्कर्ट पेंट, शर्ट, ब्लाउज आदि बनाना सिखलाया गया। प्रशिक्षार्थियों ने अपने लिए भी सलवार सूट सिए।

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श्रम विभाग की ओर से मशीन मिलने पर ये महिलाएं अपने गांव में सिलाई कर सकेंगीं। इसमें चिन्नाजोजेर, पेदाजोजेर, कमकानार, पुसनार, सावनार, तोड़का, पालनार, कोरचोली, दुवालीपारा, बुरजी, कडेर, काकेकोरमा आदि अंदरूनी गांव के प्रशिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण लिया।

समापन के अवसर पर सीआरपीएफ की 85 बटालियन के सहायक कमाण्डेंट शशिरंजन कुमार समेत अन्य अफसर आए थे और प्रशिक्षार्थियों को प्रोत्साहित किया। सीआरपीएफ की ओर से उन्हें पूड़ी, सब्जी और खीर दी गई।

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प्रोत्साहन मकसद- शशि

सहायक कमाण्डेंट शशिरंजन कुमार ने कहा कि सीआरपीएफ का मकसद अंदरूनी इलाके की महिलाओं को प्रोत्साहित कर स्वरोजगार से जोड़ना है। गणतंत्र दिवस पर भी प्रशिक्षार्थियों को 85 बटालियन की ओर से मिठाई दी गई। उन्होंने बताया कि पहले इस गांव में सीआरपीएफ की ओर से सिलाई मशीन दी गई थी। अब महिलाएं साप्ताहिक हाट में कपड़े सीकर अपनी आय बढ़ा रही हैं।