15 केन्दों से मिलेंगे हर दिन 2000 अण्डे… गार्गलिंग स्टेज में 2100 मुर्गियां, अब बस एग का इंतजार

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15 केन्दों से मिलेंगे हर दिन 2000 अण्डे… गार्गलिंग स्टेज में 2100 मुर्गियां, अब बस एग का इंतजार

पंकज दाऊद @ बीजापुर। जिले में अगले सप्ताह से हर दिन कम से कम दो हजार अण्डे हर दिन स्व सहायता समूहों की यूनिट से निकलने लगेंगे। अभी केरल से लाई गईं 2100 मुर्गिंया गार्गलिंग स्टेज में है और बस 15 केन्द्रों से अण्डों के उत्पादन का इंतजार है।

जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को स्व सहायता समूहों को सौंपे गए कुक्कुट पालन युनिट का पत्रकारों को भ्रमण करवाया गया। इस दौरान उप संचालक जनसंपर्क कमल बघेल एवं सहायक संचालक दिनेश नेताम मौजूद थे। पत्रकारों ने मुरकीनार, चेरामंगी एवं आवापल्ली में कुक्कुटपालन केन्दों का अवलोकन किया।

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इस दौरान मौजूद पशुधन विकास विभाग के उप संचालक डाॅ आनंद प्रकाश दोहरे, पशु चिकित्सक डाॅ सुरेश साहू एवं डाॅ मिथिलेश उप्पल ने लेयर बीवी 380 की खासियत से पत्रकारों को अवगत कराया। डाॅ दोहरे ने बताया कि अभी जिले में 42 यूनिट का संचालन शुरू किया गया है। एक यूनिट में 50 बर्ड हैं।

एक मुर्गी से 300 अंडे

इसकी खासियत ये है कि एक मुर्गी साल में कम से कम 300 अण्डे देती है। इसकी मृत्यु दर भी काफी कम है। 2100 में से केवल 14 मुर्गिंयों की ही मौत हुई है क्योंकि रास्ते में उन्हें दोना नहीं दिया गया। अभी यहां लाई गई मुर्गियां गार्गलिंग स्टेज में हैं यानि कुछ दिनों बाद ये अण्डे देना शुरू कर देंगी।

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उप संचालक दोहरे ने बताया कि 15 स्थानों पर उत्पादन केन्द्र बनाए गए हैं। ये अण्डे साढ़े 5 रूपए की दर से महिला एवं बाल विकास विभाग को दिए जाएंगे। सुपोषण अभियान के तहत ये अण्डे आंगनबाड़ी केन्द्रों में खपाए जाएंगे। उन्होने बताया कि समूहों को साल में एक यूनिट से कम से कम 30 हजार रूपए की आय होगी।

घर बैठे पैसा

स्व सहायता समूहों की महिलाओं को सुबह यूनिट से अण्डे बटोरना है और दाना ही देना है। वे महिलाएं दिन में दूसरा काम कर सकती हैं। ये एक पार्ट टाइम काम ही है। डाॅ दोहरे ने बताया कि एक साल बाद मुर्गी को कम अण्डे देने की दशा में 400 रूपए किलो की दर से बाजार में बेचा जा सकता है। इसके अलावा मुर्गियों का इकट्ठा किया मल भी खाद के तौर पर काम आ सकता है। इसे कोई विभाग खरीद सकता है।

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पूरा जिम्मा कंपनी का

केरल की ये कंपनी तब तक मुफ्त में दाना और दवाएं देगीं, जब तक मुर्गी अण्डे देना शुरू ना कर दे। इसके अलावा एक माह में यदि मुर्गी मरती है तो इसकी जवाबदारी भी कंपनी की होगी। इसके बदले वह दूसरी मुर्गी देगी।

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