बस्तर IG सुंदरराज पी. ने नक्सलियों को दी चुनौती, पूछे ये 5 सवाल… कहा- नेतृत्वविहीन व दिशाहीन हो गया नक्सलवाद, आतंक के बल पर टिका हुआ है संगठन

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बस्तर IG सुंदरराज पी. ने नक्सलियों को दी चुनौती, पूछे ये 5 सवाल… कहा— नेतृत्वविहीन व दिशाहीन हो गया नक्सलवाद, आतंक के बल पर टिका हुआ है संगठन

जगदलपुर @ खबर बस्तर। माओवादी आंदोलन नेतृत्वविहीन व दिशाविहीन हो गया है। इनकी कोई विचाराधारा नहीं है, सिर्फ आतंक के बल पर नक्सल संगठन टिका हुआ है। ये कहना है बस्तर आईजी सुंदरराज पी. का।

बस्तर आईजी के मुताबिक, शीर्ष माओवादी नेताओं को खुश रखने एवं टारगेट पूरा करने के लिए निचले स्तर के नक्सलियों द्वारा हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद अब तक महिला एवं नाबालिक सहित 1769 निर्दोष ग्रामीणों की माओवादियों द्वारा हत्या की गई।

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पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज, सुंदरराज पी. का कहना है कि 1967 में गरीब किसान एवं मजदूरों के हित की लड़ाई लड़ने के नाम पर पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में जन्म हुई माओवादी आंदोलन इन 53 सालों में दिशाविहीन व नेतृत्वविहीन होकर मात्र एक संगठित लूटेरे गिरोह में तब्दील हो गई है।

नक्सलियों से पूछे 5 सवाल…

बस्तर आईजी ने नक्सलियों को खुली चुनौती देते हुए उनसे 5 सवाल पूछे हैं। आईपीएस सुंदरराज ने कहा है कि सीपीआई माओवादी के महासचिव बसवराजू एवं सेन्ट्रल कमेटी में हिम्मत है तो बस्तरवासियों के इन 05 सवालों का जवाब दे सकते हैं…

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01. क्या माओवादियों के महासचिव एवं सेन्ट्रल कमेटी के निर्देश पर ही सैकड़ो बेगुनाह आदिवासियों की हत्या की गई?

02. यदि उनके निर्देश पर ही कर रहे तो किसी भी व्यक्ति का जान लेने का अधिकार उन्हें किसने दिया?

03. माओवादियों द्वारा अब तक जिन 1769 निर्दोष ग्रामीणों की हत्या की गई, उनसे नक्सली संगठन को क्या-क्या क्षति हुई। इसका व्यौरा दे सकतं हैं क्या?

04. क्या वर्तमान में जनता द्वारा माओवादी अत्याचार के विरूद्ध में उठाई जा रहे आवाज को कुचलने के लिए उनकी हत्या की जा रही है?

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05. माओवादी संगठन का असली चेहरा पहचानने के बाद संगठन छोड़कर बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं। कहीं इसी बौखलाहट के चलते तो हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम नहीं दिया जा रहा है?

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अब तक 1769 निर्दोष आदिवासियों की हत्या

बस्तर आईजी के मुताबिक, आदिवासियों के हितैषी होने का झूठा प्रचार-प्रसार कर जनता को गुमराह करने वाले नक्सल संगठन की असलियत यह है कि विगत 20 वर्षों में 1769 निर्दोष आदिवासियों को पुलिस की मुखबिरी के शक में हत्या कर दी गई। इनमें कई नाबालिक बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग व्यक्ति एवं दिव्यांग ग्रामीण लोग भी शामिल है।

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दरअसल, नक्सल आंदोलन के प्रति युवाओं में अब किसी भी प्रकार का आकर्षण नहीं रहा है। ऐसे में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए निर्दोष ग्रामीणों की हत्या करना, सड़कें, पुल-पुलियों को क्षतिग्रस्त करना, शासकीय भवनों को नुकसान पहुंचाने जैसे नकारात्मक एवं विनाशकारी कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

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माओवादियों की सेन्ट्रल कमेटी को इन 5 सवालों के माध्यम से खुली चेतावनी देते हुए पुलिस महानिरीक्षक ने कहा है कि बस्तर क्षेत्र के सर्वांगिण विकास एवं शांति स्थापित करने हेतु शासन-प्रशासन एवं सुरक्षाबल द्वारा समर्पित होकर कार्य किया जा रहा है। माओवादी आंदोलन ऐसे पड़ाव में पहुंच गया है जहां से अतिशीघ्र उनका खात्मा होना निश्चित है।