यहां एक मुर्गे पर लगा ढाई लाख तक का दांव… ताइवानी‚ आफ्रीकी और पाकिस्तानी क्राॅस ब्रीड भी उतरे मैदान में‚ तेलंगाना‚ महाराष्ट्र व सीमांध्र के शौकीनों का जमावड़ा

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यहां एक मुर्गे पर लगा ढाई लाख तक का दांव… ताइवानी‚ आफ्रीकी और पाकिस्तानी क्राॅस ब्रीड भी उतरे मैदान में‚ तेलंगाना‚ महाराष्ट्र व सीमांध्र के शौकीनों का जमावड़ा

पंकज दाऊद @ बीजापुर। छह हजार साल पुराने मनोरंजन के इस खेल में अब दण्डकारण्य इलाके की मुर्गे की नस्ल असील के ताइवानी और पाकिस्तानी क्राॅस ब्रीड भी इस मकर संक्रांति में काॅक फाइट में उतरने लगे हैं।

एक मुर्गे की जीत-हार पर मकर संक्रांति के दिन गुरूवार को भोपालपटनम में ढाई लाख रूपए तक का दांव लगा। यहां दांव लगाने तेलंगाना, सीमांध्र और महाराष्ट्र के शौकीनों का जमावड़ा लगा हुआ है।

रूद्रारम में हर साल मकर संक्रांति पर 3 दिनों तक मुर्गा लड़ाई होती थी लेकिन इस साल इसे भोपालपटनम शिफ्ट कर दिया गया। बताया गया है कि निजी भूमि होने से रिंग बनाने में दिक्कत हो रही थी।

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मकर संक्रांति 14 जनवरी को पहले दिन भोपालपटनम में स्टेडियम के समीप काॅक पिट बनाई गई। यहां भी विदेशी नस्लों के क्राॅस ब्रीड लाए गए थे।

इस खेल के शौकीन एवं पूर्व पालिका उपाध्यक्ष घासीराम नाग ने बताया कि तेलंगाना में असील की दो क्राॅस ब्रीड विकसित की गई है और ये बेहद लड़ाकू हैं। इनमें मेट्टावाटम एवं रिचूवाटम प्रमुख हैं। इन्हें भी भोपालपटनम में लड़ाई में उतारा गया था।

उन्होंने बताया कि ये नस्लें पाकिस्तानी, ताईवानी, अफ्रीकी एवं इंग्लैण्ड के मुर्गों से असील की क्रास की हुई हैं। तेलंगाना में इन मुर्गों की कीमत पचास हजार से पांच लाख रूपए तक होती है और वहां इन मुर्गों पर पांच से दस लाख रूपए तक का दांव लगता है।

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पल्ली और कोस्टा भी

सीमांध्र की नस्ल पल्ली एवं कोस्टा भी लड़ाकू प्रजाति की हैं। रिंग में उतारने से पहले लड़ने वाले दोनों मुर्गों का वजन और उंचाई मापी जाती है ताकि जोड़ी टक्कर की हो। इस इलाके में विदेशी क्राॅस ब्रीड के अलावा असील, कोस्टा और पल्ली ही मुख्य लड़ाकू प्रजातियां हैं।

बताया गया है कि इस साल भोपालपटनम के अलावा तारलागुड़ा में भी मुर्गा लड़ाई शुरू हुई। इसमें महाराष्ट्र के अहेरी, चंद्रपुर, सिरोंचा, मंचरियाल आदि स्थानों से मुर्गा लड़ाने और दांव लगाने वाले पहुंचे।

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सीमांध्र व तेलंगाना के वेंकटापुरम, कमलापुरम, ताड़वाई, पसरा, मनगुरू, चेरला, भद्राचलम, गोविंदपेटा, राजपेटा, विजयवाड़ा, करनुल एवं अन्य शहरों से लोग आए थे। ये काॅक फाइट 16 जनवरी तक चलेगी।

व्हाॅट्सएप ग्रुप भी

मुर्गा लड़ाई के शौकीनों ने इसके लिए एक व्हाॅट्सएप गुप भी बनाया है। इसमें अपने मुर्गों को वे प्रदर्शित करते हैं और इसके अलावा वे बिक्री के लिए दाम भी बताते हैं। यही नहीं मुर्गे की जोड़ी के लिए भी वे अपने गेम काॅक को दिखाते हैं।

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