कैम्प के विरोध में सिलगेर में डटे हैं 10 हजार से अधिक ग्रामीण… राशन पानी ले लोगों का जमावड़ा, बड़े विरोध के संकेत

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कैम्प के विरोध में सिलगेर में डटे हैं 10 हजार से अधिक ग्रामीण… राशन पानी ले लोगों का जमावड़ा, बड़े विरोध के संकेत

पंकज दाउद @ बीजापुर। फोर्स के ज्वाइंट कैंप को हटाने की मांग को लेकर हुई हिंसा में तीन लोगों के मारे जाने और अठारह के घायल होने के बावजूद सिलगेर गांव में दस हजार से भी अधिक लोग राशन पानी लेकर डटे हुए हैं और रात खेतों में काट रहे हैं। रूख तो ये ही बता रहा है कि कुछ ही दिनों में सुकमा या बीजापुर में बड़ा विरोध उठ सकता है।

कैम्प हटाने को लेकर 12 मई से सिलगेर गांव के आसपास के लोग विरोध कर रहे हैं। यहां अभी 10 हजार से अधिक लोग आए हैं। ये सभी अपने घरों से राशन लेकर आए हैं।

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ग्रामीण पेड़ों के नीचे खाना बनाते हैं और फिर गांव की ही एक पहाड़ीनुमा जगह में मीटिंग के लिए जाते हैं। यहां बाकायदा लाउडस्पीकर का इंतजाम किया गया है। लीड करने वाले लोगों को संबोधित करते हैं। ये रोज की प्रक्रिया है।

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गांव के लोगों ने बताया कि अभी पांच से छह लोग घायल हैं। वे इन्हें इलाज के लिए इसलिए नहीं ले जा सकते हैं क्योंकि उनके पास वाहन नहीं है और रास्ते में कैम्प है। कैम्प में उन्हें रोका जा सकता है। इस वजह से वे देसी तरीके से इलाज कर रहे हैं।

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45 किमी दूर से भी आए

ये विरोध लंबा है। इसमें सुकमा और बीजापुर दोनों जिलों के आदिवासी शामिल हैं। बताया गया है कि 40 किमी दूर पामेड़, बीस किमी दूर गोटोई, बीस किमी दूर मोरपल्ली, 45 किमी दूर तुमनार, पंद्रह किमी दूर इलगेर एवं 35 किमी दूर गुण्डम से भी लोग आए हैं।

ये ग्रामीण यहां पिछले ग्यारह दिनों से एकत्रित है। कुछ लोगों के पास राशन खत्म हो गया है, उनके लिए राशन की व्यवस्था भी गांव में ही कर दी गई है।

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थमी हुई है मुखालफत

अब विरोध प्रदर्शन केवल सिलगेर गांव में ही हो रहा है। यहां से कैम्प कोई एक किमी दूर है। 17 मई के बाद गांव के लोग कैम्प की ओर नहीं जा रहे हैं और ना तो फोर्स आगे बढ़ रही है। हालांकि बासागुड़ा से सिलगेर कैम्प तक सुरक्षा के तगड़े इंतजामात किए गए हैं। आला अफसरों को दौरा लगभग रोज हो रहा है। इधर, आदिवासी समाज के लोग भी लगातार आ रहे हैं।