अब इनके पेट में नहीं जाएगा बैलाडिला का ‘लोहा’… पीलिया और लीवर की बीमारी से मिलेगा छुटकारा

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अब इनके पेट में नहीं जाएगा बैलाडिला का ‘लोहा’… पीलिया और लीवर की बीमारी से मिलेगा छुटकारा

पंकज दाऊद @ बीजापुर। अब गंगालूर और मिरतूर गांवों की एक बड़ी आबादी को लौहयुक्त पानी से छुटकारा मिल गया है क्योंकि यहां अक्षय उर्जा विकास निगम की ओर से आयरन रिमोवल प्लांट सोलर सिस्टम से लगाए गए हैं।

– नलकूप का गंदला पानी।

क्रेडा के एई मनीष नेताम ने बताया कि मिरतूर और गंगालूर के किनारे बहने वाली नदी में बैलाडिला से लौहयुक्त पानी आता है। मिरतूर के भूजल में लोहे की मात्रा 0.89 पार्ट पर मिलीयन (पीपीएम) और गंगालूर में ये मात्रा 1.30 पीपीएम पाई गई जबकि पीने लायक पानी में ये मात्रा 0.30 पीपीएम से अधिक नहीं होनी चाहिए।

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इससे ज्यादा होने पर लोगों में बाल झड़ने, पीलिया, लीवर एवं पाचनक्रिया में परेशानी होती है। इसे देखते दोनों गांवों में जुलाई में आयरन रिमोवल प्लांट लगाए गए। मिरतूर के सरपंचपारा और गंगालूर के मोदीपारा में ये सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। इनकी क्षमता प्रतिदिन 10 हजार लीटर की है लेकिन कंटेनर बढ़ाने पर इससे अधिक पानी साफ किया जा सकता है।

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– आयरन रिमोवल के बाद ।

प्लांट में दो केन, कैथाॅयन का एक किट, रेत-कोक के फिल्टर आदि होते हैं। इनसे आयरन रिमोव हो जाता है। इस प्लांट की कीमत 7 लाख रूपए है। तीन लाख लीटर से अधिक पानी को शुद्ध करने के बाद कैथाॅयन को बदला जाता है।इसके स्थान पर नए कैथाॅयन की स्थापना की जाती है।

– गंगालूर में लगा आयरन रिमोवल प्लांट।

सोलर सिस्टम से संचालित इस प्लांट से लोगों को फायदा हो रहा है। वे अब बीमारी से बच रहे हैं। ऐसे गांव जहां लौह युक्त पानी की समस्या है, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है ताकि वहां भी ऐसे प्लांट लगाए जा सकें।

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