सिलगेर: आदिवासी समाज के लोग तिम्मापुर में ही रोके गए, खराब माहौल का हवाला देकर लौटा दिया गया

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सिलगेर: आदिवासी समाज के लोग तिम्मापुर में ही रोके गए, खराब माहौल का हवाला देकर लौटा दिया गया

पंकज दाउद @ बीजापुर। सिलगेर हिंसा के बारे में फस्र्ट हैण्ड इन्फार्मेशन लेने की कोशिश में यहां से गुरूवार की सुबह निकले सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों को तिम्मापुर में फोर्स ने रोक लिया और खराब माहौल का हवाला देते उन्हें बैरंग लौटा दिया। सुकमा के प्रतिनिधियों को भी जगरगुण्डा में रोक दिया गया।

– आदिवासी समाज के लोग रास्ते से ही लौटे

सूत्रों के मुताबिक बीजापुर और सुकमा जिले से सर्व आदिवासी समाज के लोग सिलगेर के लिए सुबह निकले थे। बीजापुर की टीम में सात और सुकमा की टीम में आठ लोग थे।

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बताया गया है कि सुबह 9 बजे समाज के प्रतिनिधियों से सिलगेर जाने से पहले कलेक्टर रितेश अग्रवाल से चर्चा की थी। इसके बाद करीब 11 बजे यहां से लोग निकले।

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टीम के प्रमुख नरेन्द्र बुरका ने बताया कि जब वे तिम्मापुर पहुंचे तो उन्हें सीआरपीएफ के जवानों ने रोक लिया और बताया कि आगे माहौल खराब है। उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं है। एसपी ने किसी को भी जाने से मना किया है।

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प्रतिनिधियों में नरेन्द्र बुरका के अलावा लक्ष्मीनारायण गोटा, अशोक तलाण्डी, अमित कोरसा एवं सुशील हेमला के साथ अन्य दो लोग थे। वे अनुमति मिलने की प्रत्याशा में एक घंटे तक रूके थे लेकिन जब अनुमति नहीं मिली तो वे लौट आए।

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नरेन्द्र बुरका ने बताया कि सुकमा से भी आठ लोग निकले थे लेकिन उन्हें फोर्स ने जगरगुण्डा में रोक लिया गया। उन्होंने बताया कि उनके जाने का मकसद वस्तुस्थिति का पता लगाना था। गोलीबारी की नौबत क्यों आई और इसमें किसकी गलती थी, ये जानना उनका मकसद था। एक और बात, समाज के लोग सिलगेर में लोगों को समझाईश भी देना चाहते थे।

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मनीष कुंजाम आएंगे

भाकपा के जिला सचिव कमलेश झाड़ी ने बताया कि आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कोण्टा के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम 22 मई को सिलगेर जाकर मारे गए लोगों के परिजनों और घायलों से मुलाकात करेंगे। उनके साथ भाकपा के वरिष्ठ नेता रामा सोढ़ी, भीमसेन मण्डावी, महेश कुंजाम, राजेश देवाराम एवं कोवाराम हेमला भी आएंगे।