दीपावली पर सुकमा पुलिस व CRPF जवान बने देवदूत… गर्भवती महिला की बचाई जान

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दीपावली पर सुकमा पुलिस व CRPF जवान बने देवदूत… गर्भवती महिला की बचाई जान

के. शंकर @ सुकमा। पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों की तत्परता से प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक ग्रामीण महिला की जान बच गई और उसे अस्पताल पहुंचाया गया।

दरअसल, सुकमा जिले के मिनपा कैम्प में एलमागुंडा के दो युवक बाइक में आए और बताया कि एक महिला दो दिन से प्रसव पीड़ा में है और उसको अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की जरूरत है। युवकों ने ये भी बताया कि कुछ लोग उस महिला को चारपाई पर डालकर ला रहे हैं।

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इसकी सूचना तुरन्त मिनपा कैम्प में मौजूद वरिष्ठ अधिकारी विक्रम सिंह टूआईसी 131 बटालियन सीआरपीएफ को दिया और ऋषभ शर्मा एसी. सी/150 बटालियन व दिनेश पाल सिंह एसी. एफ/131 बटालियन कैम्प के गेट पर पहुंचे। वहां अधिकारियों ने पूरे मामले की जानकारी ली और तुरन्त 102 व 108 के माध्यम से एम्बुलेंस मंगवाने की कोशिश की। लेकिन एम्बुलेंस अनुपलब्धता के कारण नहीं मिली।

– कैम्प में महिला के साथ मौजूद ग्रामीण

ऐसे में CFPF अफसरों ने ब्लॉक चिकित्साधिकारी से भी बात करने की कोशिश की किन्तु उनसे संपर्क नही हो पाया। इसके बाद मिनपा कैम्प के अधिकारियों द्वारा तुरन्त चिंतागुफा थाना प्रभारी मनीष मिश्रा को सपंर्क किया गया। उन्होंने जल्द से जल्द एम्बुलेंस की व्यवस्था कर भिजवाने का आश्वासन दिया।

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इसी बीच गर्भवती महिला को चारपाई में लेकर कुछ लोग मिनपा कैम्प पहुंच चुके थे। कैम्प में 241 बस्तरिया बटालियन व 150 बटालियन के जवानों ने गर्भवती महिला व गांव वालों के लिए खाने पीने का भी उचित इंतजाम किया गया।

– गर्भवती महिला

इस प्रकार सीआरपीएफ व सुकमा पुलिस के सम्मिलित प्रयासों से लगभग साढ़े बारह बजे एम्बुलेंस पहुंच चुकी थी और प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला को उचित उपचार के लिए सकुशल भिजवाया जा सका।

बता दें कि सीआरपीएफ के अधिकारियों द्वारा महिला के परिवार को आर्थिक मदद का प्रस्ताव भी दिया गया, परन्तु उन्होंने बताया कि उनके पास पर्याप्त रकम है, फिर भी सीआरपीएफ के अधिकारियों द्वारा कुछ आर्थिक मदद किया गया।

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बताया गया है है कि गर्भवती महिला सुष्मिता (21 वर्ष) पति रमेश निवासी एलमागुंडा प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। गांव वाले उसे चारपाई पर लेकर कैम्प तक पहुंचे थे। पुलिस व सीआरपीएफ अफसरों की पहल के बाद उसे जब अस्पताल भिजवाया गया तो पता चला कि गर्भ में ही नवजात की मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों के अथक प्रयासों से महिला को बचा लिया गया।