अचार तो दूर, इस साल चटनी को भी तरस गए लोग… जानिए, आखिर क्या है आम के नहीं ‘बौराने’ का राज !

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The mango pickle is far away people also have a craving for chutney

अचार तो दूर, इस साल चटनी को भी तरस गए लोग… जानिए, आखिर क्या है आम के नहीं ‘बौराने’ का राज !

पंकज दाऊद @ बीजापुर। इस साल जिले में आम की फसल नहीं के बराबर हुई और इसके पीछे दो सबब सामने आए हैं। जंगल में आम के वृक्षों में तो आम बिलकुल भी नहीं लगे हैं और इससे लोग अचार तो दूर, इसकी चटनी के लिए भी तरस गए।

यहां से 10 किमी दूर नुकनपाल के एक अमराई के मालिक गोविंद तलाण्डी कहते हैं कि उनके बागीचे में बैंगनपरी, नीलम, दशहरी, बारहमासी एवं देसी किस्म के आम के पेड़ हैं। इस साल कुछ पेड़ों में इक्का-दुक्का आम ही लगे। पिछले साल अच्छी फसल थी। उन्होंने सीजन में 50-60 हजार रूपए के आम बेचे थे।

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इधर, उद्यानिकी विभाग की पामलवाया नर्सरी में भी बहुत ही कम आम लगे हैं जबकि पिछले साल यहां अच्छी फसल थी। सड़क के किनारे लगाए गए पेड़ों और जंगल में भी आम दिखाई नहीं पड़े हैं जबकि एक साल पहले ये पेड़ आमों से लदे थे।

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इस बारे में शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धरमपुरा जगदलपुर के वनस्पति विभाग के सहायक प्राध्यापक तुणीर खेलकर कहते हैं कि इस साल आम की फसल के कमजोर होने के दो प्रमुख कारण हैं। एक तो बौर लगने के समय बारिश हुई और बौर झड़ गए।

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दूसरी खास वजह आम के पेड़ों का किसी रूप में उर्जा या एनर्जी संचय (स्टोर) करना है। दरअसल, फूल और फल बनाने में पेेड़ को काफी उर्जा खर्च करनी होती है। इस वजह से हर दूसरे साल वह उर्जा का संचय करता है। ये साल भी उर्जा संचय का है और इस वजह से पेड़ों पर फल कम आए।

फूल बनने के लिए जिम्मेदार कौन

फूल बनने के लिए बहुत सारी चीजें जिम्मेदार होती हैं। डण्ठल और पत्ती में तीन प्रकार के रसायन ए, बी और सी बनते हैं। इन्हें फ्लोरोजेन नामक हार्मोन पुष्पीकरण के लिए प्रेरित करता है।

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पादप हार्मोन ए, बी और सी रसायन को नियंत्रित करते हैं। ये नियंत्रण उर्जा पर आधारित होता है। एक पादप हार्मोन डण्ठल में ज्यादा मात्रा में बन गया तो ये डण्ठल कमजोर हो जाता है और हवा-अंधड़ से टूट जाता है। फिर फूल नहीं बन पाते हैं।

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