अनुसूचित क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी, आदिवासी खफा… सिलगेर को लेकर भी 19 को आंदोलन करेंगे

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अनुसूचित क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी, आदिवासी खफा… सिलगेर को लेकर भी 19 को आंदोलन करेंगे

पंकज दाउद @ बीजापुर। अनुसूचित क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी को लेकर आदिवासी समाज प्रशासन व सरकार से बेहद खफा है और सिलगेर गोलीबारी समेत दीगर मामलों को लेकर 19 जुलाई को ब्लाॅक स्तर पर प्रदर्शन का मन बना लिया है।

– तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते आदिवासी समाज के प्रतिनिधि

सर्व आदिवासी समाज की ओर से इस आशय का एक ज्ञापन गुरूवार को यहां तहसीलदार को सौंपा गया। गोण्डवाना समाज के जिला उपाध्यक्ष अमित कोरसा, सर्व आदिवासी समाज के ब्लाॅक अध्यक्ष मंगल राना, गोण्डवाना समाज के सचिव विनय उईके एवं आदिवासी समाज के सदस्य लक्ष्मण कड़ती ने ये ज्ञापन सौंपा।

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आदिवासी समाज ने कहा है कि सुकमा जिले के सिलगेर में गोलाबारी की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। इस काण्ड में मारे गए लोगों के परिवारों को पचास-पचास लाख रूपए एवं घायलों को पांच-पांच लाख रूपए के अलावा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की गई।

आदिवासी समाज बस्तर में राज्य सरकार की पहल पर नक्सली समस्या के स्थायी समाधान की तलाश भी कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट से स्थगन की समाप्ति तक पदोन्नति में आरक्षण, आरक्षित पदोन्नत रिक्त पदों को नहीं भरने एवं सामान्य वर्ग के पदोन्नति प्राप्त कर्मचारियों को पदावनत करने की मांग की गई है।

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नई भर्तियों में आरक्षण रोस्टर लागू करने एवं बैकलाॅग भर्ती की मांग समाज ने की है। पांचवी अनुसूची क्षेत्र में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदों पर जिला एवं संभाग स्तर पर स्थानीय निवासियों की भर्ती, फर्जी जाति प्रकरणों में दोषियों पर कार्रवाई, छग की 18 जनजातियों की मात्रात्मक त्रुटि हटाकर उन्हें लाभ दिलाने, जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं करने वाले अफसरों पर कार्रवाई, छात्रवृत्ति मामले में आदिवासी छात्रों के लिए आय की सीमा हटाने और वन अधिकार कानून 2006 का कड़ाई से पालन किए जाने की मांग समाज ने की है।

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फिर उठी पेसा कानून की मांग

आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने पेसा कानून की मांग फिर उठाई है। समाज का कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की अनुमति के बगैर पंचायत को नगर का दर्जा दिया गया है। इसे फिर से ग्राम पंचायत में परिवर्तित किया जाए।

समाज ने कहा है कि खनिज उत्खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की जगह लीज में लेकर मालिकों को शेयर होल्डर बनाना चाहिए। गांव की जमीन से खनन एवं निकासी का अधिकार ग्राम सभा को दिया जाना चाहिए।