फोर्स को हटाने की अगली रणनीति क्या होगी ? खूनी संघर्ष के बाद भी आदिवासी सिलगेर में डटे

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फोर्स को हटाने की अगली रणनीति क्या होगी ? खूनी संघर्ष के बाद भी आदिवासी सिलगेर में डटे

पंकज दाउद @ बीजापुर। सुकमा जिले के सिलगेर के समीप बने सुरक्षाबलों के शिविर के आसपास आंदोलन के दौरान 3 लोगों के मारे जाने और 18 लोगों के घायल होने के एक दिन बाद भी गांव में दो जिलों के आदिवासी जुटे थे। समझा जाता है कि फोर्स को हटाने की रणनीति पर वे विचार कर रहे हैं।

सिलगेर गांव में मंगलवार को करीब दो दर्जन गांव के लोग फिर से एकत्र हुए थे। इनमें तीन मृतकों और घायलों के परिजन भी आए थे। वे मीडियाकर्मियों से रूबरू हुए और अपनी व्यथा बताई।

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मृतक वेगा कवासी निवासी चुटवाही के आठ बच्चे हैं। इनमें छह लड़के और दो लड़कियां हैं। बच्चे गंगी, भीमा, लालू एवं नंदू सिलगेर आए थे। घर के मुखिया की मौत से वे परेशान हैं। मारे गए उइका मुरली निवासी तिप्पापुरम सिलगेर के भाई आए थे। उरसा भीमा निवासी गुण्डम के परिजन आए थे।

बताया गया है कि अंतिम संस्कार के बाद ही ये तय किया जाएगा कि सरकार से कितना मुआवजा लिया जाए क्योंकि वे बेकसूर थे और उनकी जान गई। सिलगेर गांव में सुबह से बैठक चल रही थी। माहौल में तनाव भी था।

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इधर, पुलिस हालात को भांपते सुरक्षा में लगी थी। आला अफसरों की आमदरफ्त हो रही थी। हालांकि ये इलाका सुकमा जिले में आता है लेकिन किसी हिंसा को टालने बीजापुर जिले से भारी फोर्स की तैनाती की गई थी। चप्पे चप्पे पर सीआरपीएफ और डीआरजी के अलावा एसटीएफ के जवान तैनात थे।

बता दें कि तर्रेम थाने के बाद एक कैम्प और है। इसके बाद सिलगेर गांव से पहले ये कैम्प 12 मई को खोला गया है और इसे लेकर गांव के लोग खफा हैं।

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बंदूकधारी से लड़ें

गांव के लोगों का कहना है कि सुरक्षाबल अपना मुकाबला सीधे बंदूकधारी नक्सलियों से करें। इस क्षेत्र में गांव के लोग परेशानी में ना आएं, इसलिए भी कैम्प का विरोध हो रहा है। गांव के किसानों को बंदूक की नोक पर डराना बंद किया जाना चाहिए।

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