दीपक बनाने वाले कुम्हारों के घरों में है अंधेरा… आपकी एक छोटी सी कोशिश इनकी भी दिवाली रौशन कर सकती है

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दीपक बनाने वाले कुम्हारों के घरों में है अंधेरा… आपकी एक छोटी सी कोशिश इनकी भी दिवाली रौशन कर सकती है

के. शंकर @ सुकमा। रौशनी और उजाले का पर्व दीपावली नजदीक आ रहा है। त्यौहार को लेकर घरों में तैयारियां भी शुरू हो गई है लेकिन जिन दीपकों से इस पर्व में चार चांद लगते हैं, उनका निर्माण करने वाले कुम्हारों के घरों में अंधेरा पसरा हुआ है।

दरअसल, आधुनिकता की दौड़ में मिट्टी से बने दीपों की जगह आर्टिफिशियल लाइट्स ने ले ली है। ऐसे में दीपावली के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण दीपक और लक्ष्मी, गणेश की मूर्तिया गढ़ने वाले कुम्हार अपने घरों को रौशन करने से वंचित हैं और अपनी पुस्तैनी कला एवं व्यवसाय से जैसे विमुख हो रहे हैं।

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लॉकडाउन के बाद तो ऐसे परिवारों पर आर्थिक संकट गहराता गया है। तमाम दुश्वारियों के बावजूद ये मेहनतकश किसी तरह अपने हुनर को संजो कर रखे हुए हैं। आज ऐसे कई परिवार लाचार और बेबसी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

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दीपावली के करीब आते ही इन दिनों कुम्हार अपने पूरे परिवार के साथ मिट्टी के दीये बनाने में जुटे हुए हैं। सुकमा जिला मुख्यालय के कुम्हाररास सहित अन्य स्थानों पर रहने वाले कुम्हार इन दिनों चाक पर मिट्टी के दीए बनाने में व्यस्त हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनके बनाए दियों को खरीदार मिलेंगे और उनका भी त्यौहार रौशन होगा।

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इस उम्मीद के बीच कुम्हारों को एक भय भी सता रहा है। कहीं दीपकों की बिक्री नहीं हुई तो, हम अपने बच्चों के सवालों के जवाब कैसे दे पायेंगे, उन्हें कहाँ से नये कपड़े दिला पायेंगे। कैसे मनेगी परिवार की दिवाली। हालांकि, उनके चेहरों पर बरसों पहले जैसी खुशी तो नहीं है, फिर भी उम्मीद है कि उनकी मेहनत से बने मिट्टी के दीपकों की अच्छी बिक्री होगी।

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मिट्टी के दीयों की ब्रिकी पर असर

मिट्टी के दिए तैयार करने वाले बताते हैं कि चाइनीज लाइट्स ने मिट्टी के दीयों की ब्रिकी पर असर डाला है। धीरे-धीरे मिट्टी के दीयों की बिक्री में कमी आई है। लेकिन इन सबके बावजूद कुम्हार अपने पूरे परिवार के साथ चाक पर दीपक बनाने में जुटे हैं।

महिलाएं भी समूह बनाकर हाथो से मिट्टी को दीपक का आकार दे रहीं हैं ताकि परिवार की आर्थिक मदद हो सके और इस बार दीपकों के त्यौहार में ज्यादा से ज्यादा दीपक की बिक्री हो सके।

दरअसल, कुम्हारों के लिए दीपावली मात्र एक पर्व न होकर जीवन यापन का बड़ा जरिया भी है। इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहा जाए कि दीपावली के दिन लोग घरों में जिस लक्ष्मी, गणेश की पूजा मूर्तियों और दीपक के जरिए लक्ष्मी के आगमन के लिए करते हैं। उसे गढ़ने वाले कुम्हारों से ही वह कोसो दूर है।

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ताकि रौशन हो दीपावली

ऐसे में हमारी एक मुहिम, एक छोटी सी कोशिश है, इस बार दिवाली पर्व में लोग मिट्टी के दिये खरीदें, ताकि जिन कुम्हारों के घरों में अंधकार ने घर कर लियाउसे हमारी सोच, हमारी कोशिश से एक नई उम्मीद मिले और हम सबकी तरह यह त्यौहार भी कुम्हारों के लिये खुशहाली लाये…

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