बंगाल की खाड़ी से भद्राकाली तक का एक दिलचस्प सफर ! 700 किमी दूर से आते हैं झींगे

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बंगाल की खाड़ी से भद्राकाली तक का एक दिलचस्प सफर ! 700 किमी दूर से आते हैं झींगे

पंकज दाऊद @ बीजापुर। मानो या ना मानो बीजापुर जिले के भद्रकाली में इंद्रावती और गोदावरी नदी तक बंगाल की खाड़ी से झींगे तैरकर हर साल आते और लौट जाते हैं। करीबन 700 किमी के इस अनोखे सफर में कई झींगे विपरित परिस्थिति में संघर्ष करते मर जाते हैं।

– भद्रकाली में गोदावरी और इंद्रावती का संगम

ये एक खास प्रकार का झींगा होता है और इसकी लंबाई आठ सेंटीमीटर तक होती है। मेक्रोब्रेकियम रोजनबर्गी नामक इस झींगे की अच्छी मार्केट वैल्यू है। ये एक हजार से दो हजार रूपए किलो की दर पर बिकता है। मछुआरों की आय का यह अच्छा साधन भी है। यही वजह है कि इसे एक्सपोर्ट भी किया जाता है।

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पांच सितारा होटलों में भी इस झींगे की खासी मांग है। ये झींगे गोदावरी, इंद्रावती एवं महाराष्ट्र के सिरोंचा के पास बहने वाली प्राणहिता नदी में मिलते हैं। ये एक खास सीजन में ही आते हैं और समुद्र की ओर लौट जाते हैं। जनवरी से मार्च के बीच गोदावरी, इंद्रावती एवं प्रणीता नदियों में ये मिलते हैं।

मत्स्य निरीक्षक चंद्रशेखर चिंतूर बताते हैं कि समुद्र से मादा झींगा अण्डे देने नदी की ओर आती है। समुद्र के खारे पानी और नदी के पानी के पास ये अण्डे देती है और फिर समुद्र की ओर लौट जाती है। यहां अण्डे से बच्चे निकलते हैं जो 6 मिमी तक के होते हैं।

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इनकी बढ़वार के लिए नदी का जल और परिस्थिति अनुकूल होती है। ये बच्चे नदियों की बढ़ते जाते हैं। प्रणीता, गोदावरी एवं इ्रद्रावती नदियों की एक खास बात ये है कि यहां एक विषेष किस्म की घास होती है।

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ये इनके लिए चारा है। झींगे इसे चरते-चरते आगे बढ़ते हैं। इन नदियों का तापमान भी इनके अनुकूल होता है। मत्स्य निरीक्षक चंद्रशेखर चिंतूर ने बताया कि एक करोड़ बच्चों में एक लाख झींगे ही सर्वाइव कर पाते हैं।

झील में भी पालन

सीमांध्र में नदियों से जुड़ी झीलों में भी झींगे पहुंच जाते हैं। यहां किसान इसे अच्छी तरीके से पालते हैं और मुनाफा कमाते हैं। बताया जा रहा है कि गोदावरी नदी में सीमांध्र में एक बड़ा बांध बन रहा है। इसके बाद छग और महाराष्ट्र में झींगों का आना कम हो जाएगा।

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