साइकिल रेस: हरियाणा और यूपी के 518 बाइकर्स से आगे निकल गया द्वारिकाधीश… जानिए, इन पैरों में इतना दम कहां से पैदा हुआ ?

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साइकिल रेस: हरियाणा और यूपी के 518 बाइकर्स से आगे निकल गया द्वारिकाधीश… जानिए, इन पैरों में इतना दम कहां से पैदा हुआ ?

पंकज दाऊद @ बीजापुर। छग के अलावा हरियाणा और यूपी के 518 बाइकर्स को 30 किमी की साइकिल रेस में पीछे छोड़ने वाले राजनांदगांव के 20 बरस के युवा द्वारिकाधीष वर्मा के पैरों में इतना दम कहां से आया? इसके पीछे बहुत कुछ छिपा है। दरअसल, वह ट्राइएथेलाॅन का खिलाड़ी है और यदि दौड़ व तैराकी की स्पर्धा भी होती तो वह इनमें भी 518 खिलाड़ियों को धूल चटा देता।

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जिला प्रशासन की ओर से मनवा बीजापुर के तहत स्वतंत्रता दिवस पर यहां ओपन साइकिल रेस स्पर्धा का आयोजन किया गया। इसमें हरियाणा और यूपी से भी बाइकर्स आए थे। स्पर्धा में 519 प्रतिभागी थे। द्वारिकाधीश ट्राइएथेलाॅन का खिलाड़ी है। ये एक मल्टी इवेंट स्पर्धा है। इसमें तैराकी, दौड़ व साइकिलिंग एक के बाद एक होती है।

इस मल्टी इवेंट स्पर्धा के चलते द्वारिकाधीश के पास प्रतिद्वंदियों से अधिक स्टेमिना था और वह साइकिल रेस में इसी वजह से अव्वल आया।

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हाल ही में चेन्नई में ट्राइएथेलाॅन में उसने हिस्सा लिया। इसमें 15 सौ मीटर तैराकी, 40 किमी साइकिलिंग व 10 किमी की दौड़ थी। इस नैशनल स्पर्धा में उसे 11वां रेंक मिला। 14 अगस्त को राजनांदगांव में ही हुई 16 सौ मीटर दौड़ में उसने प्रथम स्थान पाया।

द्वारिकाधीश एक छोटा सा किसान है। वह सब्जी की खेती करता है। कोई एक एकड़ 40 डिसमिल से उसका परिवार चलता है। उसकी दिलचस्पी ट्राइएथेलाॅन में शुरू से ही रही। वह कहता है कि मौका मिले तो वह इंटरनैशनल गेम्स में भी हिस्सा लेगा।

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अब ओलिंपिक में भी

वैसे तो 1920 में फ्रांस में ट्राइएथेलाॅन की उत्पत्ति हुई लेकिन ये मल्टी इवेंट रेस 1934 में लोकप्रिय हुआ। कैलिफोर्निया में 1974 में पहली बार बड़े स्तर पर इसका आयोजन किया गया। इक्कीसवीं सदी के पहले ये खेल ओलिंपिक में शुमार हो गया। भारत में इसका एक फेडरेशन भी है। ये फेडरेशन समय-समय पर ट्राइएथेलाॅन का आयोजन करता है।