सहायक शिक्षकों के 2512 पदों पर होगी भर्ती, DPI ने जारी किए निर्देश

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सहायक शिक्षकों के 2512 पदों पर होगी भर्ती, DPI ने जारी किए निर्देश

रायपुर @ खबर बस्तर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा सहायक शिक्षक भर्ती पर लगी रोक हटाने के बाद अब नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। कोर्ट से मिली हरी झंडी के बाद बस्तर और सरगुजा संभाग के अलावा कोरबा जिले में सहायक शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सहायक शिक्षकों की भर्ती पर लगी रोक हटा दी है। प्रदेश के किसी भी जिले का पात्र अभ्यर्थी कोरबा, सरगुजा व बस्तर में शिक्षक बन सकता है।

इस आदेश के साथ ही सहायक शिक्षकों के 2700 पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि, अभी जो जानकारी आई है, उसके मुताबिक फिलहाल सिर्फ 2512 पदों पर नियुक्तियां होगी। अब इस मामले में डीपीआई ने नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के लिए सभी संबंधित डीईओ को निर्देश जारी कर दिया है।

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विभाग की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक चिप्स की तरफ से मेरिट लिस्ट अरेंज की जायेगी, जिसकी भर्ती डीईओ की तरफ से की जायेगी। 25 मई तक प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए सरगुजा-बस्तर संभाग के साथ-साथ कोरबा जिले में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरी में सिर्फ स्थानीय लोगों को ही मौका दिये जाने के आदेश को निरस्त कर दिया था।

– छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

कोर्ट ने इस अध्यादेश को निरस्त करने का आदेश ये कहते हुए दिया था कि स्थानीयता के आधार नौकरी दिये जाने का अधिकार पर कानून सिर्फ संसद में बन सकता है। सरकार या राज्यपाल इस पर कोई भी कानून नहीं बना सकती है।

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क्या था मामला

राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों के साथ ही कोरबा, सरगुजा व बस्तर संभाग में 19 मार्च 2019 को सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस भर्ती में प्रदेशभर से अभ्यर्थियों ने भाग लिया, लेकिन दूसरे जिलों के आवेदकों को भर्ती का मौका नहीं दिया गया।

बता दें कि 17 जनवरी 2012 को राज्यपाल द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें बस्तर और सरगुजा संभाग में स्थानीय निवासियों को ही तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों पर मौका देने संबंधी अधिसूचना जारी की गई थी।

यह आदेश केवल 2 साल के लिए लागू किया गया था। बाद में इसे बढ़ाकर 2023 तक कर दिया गया। यही नियम कोरबा जिले में भी लागू है।

राज्यपाल की इस अधिसूचना के खिलाफ शुशांत शेखर धराई और उमेश मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। राज्यपाल की अधिसूचना को चुनौती देते हुए कोर्ट को बताया कि प्रदेश के लोगों को जाति, जन्म व निवास के आधार पर नौकरी देने से वंचित नहीं किया जा सकता। प्रदेश का कोई भी व्यक्ति राज्य के किसी भी जिले में सरकारी नौकरी के लिए पात्र है।

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