‘जीने लायक’ वेतन दिए जाने की मांग उठने लगी… नेट पर काम, मोबाइल और रिचार्ज का खर्च कौन देगा ?

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‘जीने लायक’ वेतन दिए जाने की मांग उठने लगी… नेट पर काम, मोबाइल और रिचार्ज का खर्च कौन देगा ?

पंकज दाऊद @ बीजापुर। बरसों से महिला एवं बाल विकास विभाग में काम कर रही कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अब जीने लायक वेतन दिए जाने की मांग उठाई है और कहा है कि नेट से काम तो लिया जा रहा है लेकिन उन्हें ना तो मोबाइल दिया गया है और ना ही रिचार्ज का खर्च दिया जाना है।

छग आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ की जिला शाखा ने यहां सांस्कृतिक भवन परिसर में एक दिनी धरना दिया और आठ सूत्री मांगों को ले रैली निकाली। संघ ने इस  आशय का एक ज्ञापन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग एवं प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा।

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संगठन की जिला अध्यक्ष रेहाना खान ने कहा कि मप्र में कार्यकर्ताओं को दस हजार रूपए वेतन दिया जा रहा है। छग में कार्यकर्ताओं को 6563 एवं सहायिकाओं को 3200 रूपए दिए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं को केन्द्र से 4000 एवं राज्य से 2563 रूपए दिए जाते हैं।

– धरने पर बैठी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं।

इसी पैसे से उन्हें पेट्रोल एवं मोबाइल रिचार्ज का खर्च उठाना पड़ता है। मोबाइल भी सरकार की ओर से नहीं दिए गए हैं। डाटा और हाजिरी की तस्वीर रोजाना नेट से मुख्यालय को भेजी जाती है।

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संगठन ने शिक्षाकर्मियों की मानिंद उन्हें भी सरकारी कर्मी घोषित किए जाने की मांग की है। मिनी आंगनबाड़ी के कार्यकर्ताओं को एक हजार रूपए मानदेय दिया जाता है। मिनी को पूर्ण आंगबाड़ी घोषित किए जाने, कार्यकर्ता के रिक्त पदों को सहायिकाओं से ही भरने और 25 फीसदी के बंधन को समाप्त करने, मासिक पेंशन, ग्रेच्युटी एवं समूह बीमा का लाभ दिए जाने एवं मोबाइल  नेट चार्ज एवं मोबाइल भत्ता दिए जाने  की मांग की गई है।

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जिला अध्यक्ष रेहाना खान ने कहा है कि आकस्मिक मृत्यु हो जाने पर परिवार के एक सदस्य को नौकरी एवं 50 हजार रूपए दिया जाना चाहिए। इस धरने में सचिव करूणा, कोषाध्यक्ष सुलोचना आदि पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद थे।

200 से अधिक आंगनबाड़ियां प्रभावित

जिलाध्यक्ष ने कहा कि एक दिनी धरने से कम से कम दो सौ से अधिक आंगनबाड़ियों का कामकाज प्रभावित हुआ है। जिले में इस संघ से 400 कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं जुड़ी हैं। एक अनुमान के मुताबिक कम से कम बारह सौ महिलाओं एवं बच्चों को पूरक पोषण आहार धरने के कारण नहीं मिल पाया।