अपने लगाए पेड़ काटने अब चक्करदार रास्तों की दरकार नहीं…. वन विभाग ने किसानों और पंचायतों से की चर्चा

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अपने लगाए पेड़ काटने अब चक्करदार रास्तों की दरकार नहीं…. वन विभाग ने किसानों और पंचायतों से की चर्चा

पंकज दाऊद @ बीजापुर। पहले के उलट अब अपने खेतों में पेड़ लगाने के बाद इन्हें काटने के लिए राजस्व या वन विभाग के चक्कर लोगों को लगाने नहीं पड़ेंगे। इसके लिए प्रक्रिया का सरलीकरण किया जा रहा है।

यहां तेंदू हॉल में मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के तहत आयोजित कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों, किसानों और ग्रामीणों को इस बात की जानकारी दी गई। इस मौके पर मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम ने कहा कि पेड़ों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अब तो कायदे तैयार हो रहे हैं, उससे किसानों को काफी फायदा होगा। उन्हें पेड़ों को काटने में झंझट में नहीं पड़ना पड़ेगा।

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इस मौके पर बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की सदस्य नीना रावतिया उद्दे ने कहा कि वनाधिकार पट्टे कई लोगों को मिले हैं। इस भूमि का इस्तेमाल भी पेड़ों को लगाने किया जा सकता है। उन्होंने जल संरक्षण पर जोर देते कहा कि मौजूदा विधायक विक्रम मण्डावी की पहल पर कई गांवों में जल संरचनाओं का विकास हुआ है। साफ पानी गांव तक पहुंचाने की कोषिष की जा रही है।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश कारम ने कहा कि प्रोत्साहन योजना भूपेश सरकार की अच्छी पहल है। हमें वृक्षों को लगातार लगाना चाहिए। खाली भूमि का इस्तेमाल इस काम के लिए किया जाना चाहिए।

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कार्यक्रम में जनपद उपाध्यक्ष सोनू पोटाम, एसडीओ प्रकाश नेताम, नरसिंह नायडू, एस चलमैया, रेंजर मनोज बघेल, कोटेश्वर राव चापड़ी, सच्चिदानंद यादव आदि मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएफओ अशोक पटेल ने की।

हर एकड़ दस हजार

डीएफओ अशोक पटेल ने बताया कि पंचायत या वन धन समितियां यदि गांव की राजस्व या चराई भूमि पर पेड़ लगाती हैं तो उन्हें एक बार प्रति एकड़ दस हजार रूपए की सहायता दी जाएगी। यदि कोई किसान अपने खेतों में पेड़ लगाता है तो उसे तीन साल तक दस-दस हजार रूपए की राषि वन विभाग की ओर से दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पेड़ काटने के नियम का सरलीकरण किया गया है। पहले जैसी परेशानी अब नहीं होगी।

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लेमन ग्रास के फायदे बताए

लेमन ग्रास पर सालों से काम कर रहे विषय वस्तु विषेषज्ञ अरूण चौबे ने इस मौके पर बताया कि पेड़ों के बीच लेमन ग्रास लगाया जा सकता है। इससे निकलने वाले सत्व की कीमत बाजार में 17 सौ रूपए लीटर है। कुछ किसान मिलकर इसकी खेती कर सकते हैं। इसके लिए मार्केट की ज्यादा जरूरत नहीं हैं क्यांकि दवा कंपनियां इसे हाथों हाथ खरीद लेती हैं।