भोपालपटनम में खुलेगा कागज कारखाना, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज… एक साल में खड़ी हो जाएगी फैक्ट्री, अब नए कूप खोलने की दरकार

152

भोपालपटनम में खुलेगा कागज कारखाना, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज… एक साल में खड़ी हो जाएगी फैक्ट्री, अब नए कूप खोलने की दरकार

पंकज दाऊद @ बीजापुर। यहां से 50 किमी दूर भोपालपटनम में कागज कारखाना खोलने की कवायद शुरू हो गई है और राजस्व की जमीन नहीं मिलने पर 48 हेक्टेयर वनभूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके साथ ही अब बांस के नए कूपों को खोलने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।

– बांस के झुरमुट।

डीएफओ अशोक कुमार पटेल ने बताया कि तारलागुड़ा रोड पर 48 हेक्टेयर वन भूमि को उद्योग विभाग को देने की प्रक्रिया चल रही है। ले आउट के साथ केस तैयार कर लिया गया है। बहुत जल्द ही ये भूमि जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के सुपूर्द हो जाएगी। एक साल में कारखाना बनाने की मियाद मुकर्रर की गई है।

यह भी पढ़ें :  सुकमा में नक्सली वारदात, मुखबिरी के शक में दो युवकों को उतारा मौत के घाट

डीएफओ अशोक पटेल के मुताबिक अभी जिले में बांस के 29 कूप हैं और इनमें से 6 कूपों में ही बांस कटाई हो रही है। कारखाने में बांस की ज्यादा खपत होगी। अभी बांस बल्लारशाह पेपर मिल, मप्र एवं अमलई पेपर मिल महाराष्ट्र खरीद रही है। यहां कारखाना खुल जाने पर इसी में ही जिले के बांस की खपत होगी।

डीएफओ के मुताबिक, गंगालूर इलाके के कूपों को भी अगले सत्र से खोलने की तैयारी है। इधर, भैरमगढ़ इलाके के लोगों ने भी कूपों को खुलवाने की मांग की है। वे बांस कटाई करने को भी तैयार हैं।

यह भी पढ़ें :  DRG जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़... गोलीबारी में भारी पड़े जवान तो भागे माओवादी, विस्फोटक बरामद

75 फीसद उत्पादन जिले में

डीएफओ अशोक पटेल ने बताया कि छग में भानुप्रतापपुर, खैरागढ़ एवं अन्य स्थानों पर भी बांस कटाई होती है लेकिन राज्य में 75 प्रतिशत बांस का उत्पादन बीजापुर में ही होता है। इस साल 709015 व्यापारिक बांस काटे गए जबकि औद्योगिक बांस का उत्पादन 89341 बण्डल हुआ। ये कागज कारखाने के लिए नाकाफी हैं और इसलिए नए कूपों को खोलने की जरूरत आन पड़ी है।

लाखों का बोनस

बांस की कटाई से वन प्रबंधन समितियों को हर साल लाखों रूपए का बोनस मिल रहा है। वन प्रबंधन समिति के एरिया में आने वाले कूपों की कटाई के बाद खर्च काटकर 100 फीसदी बोनस उनके खातों में जमा कर दिया जाता है। अभी जिले में 6 समितियों को इसका लाभ मिल रहा है। इनमें बरदेली, उल्लूर, वाडला, चेरपल्ली, बंदेपारा एवं सोमनपल्ली ष्षामिल हैं।

यह भी पढ़ें :  नक्सली लीडर रमन्ना की मौत पर दक्षिण सब जोनल ब्यूरो गणेश उईके ने जारी किया प्रेस नोट, कही ये बात !

डीएफओ ने कहा कि इससे रोजगार के अलावा गांव के विकास के लिए पैसा मिलता है। बोनस की राशि से सामुदायिक फेंसिंग एवं अन्य काम समितियां करवाती हैं। इस राशि पर वन विभाग का हक नहीं होता है।

Watch Video