पटवारियों की बेमियादी हड़ताल से राजस्व के काम ठप, किसानों के सरकारी कामकाज पर भी असर

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पटवारियों की बेमियादी हड़ताल से राजस्व के काम ठप, किसानों के सरकारी कामकाज पर भी असर

पंकज दाऊद @ बीजापुर। जिले के सभी 74 पटवारी कई मांगों को लेकर सोमवार से बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं और इसका सीधा असर राजस्व ही नहीं बल्कि किसानों के सरकारी कामकाज पर पड़ने लगा है।

धान की कटाई हो रही है और ये जल्द ही पूरी हो जाएगी। धान विक्रय की निगरानी, रकबा कम या ज्यादा करने एवं फसल कटाई प्रयोग पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

बताया गया है कि सीमांकन, बंटवारा, नामांतरण, राजस्व न्यायालय को दिए जाने वाले जांच प्रतिवेदन, जाति, आवास, आय प्रमाण पत्र, नक्शा खसरा बनाने वालों के हड़ताल पर चले जाने से लोगों की परेशानी दो गुनी हो गई है।

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अभी राज्य सरकार ने 7500 वर्ग फीट जमीन बेचने का कार्यक्रम शुरू किया है। हड़ताल से इस पर भी असर पड़ेगा। जिला पटवारी संघ का कहना है कि अब सारे कामकाज आनलाइन हो गए हैं और पटवारियो के पास कंप्यूटर, लैपटाॅप एवं नेट की सुविधा नहीं है।

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ऐसे में अफसर काम आनलाइन करने दबाव बनाते हैं और जानकारी तत्काल भेजने कहते हैं। मात्रात्मक या कोई त्रुटि हो जाने की दशा में पटवारियों के खिलाफ विभागीय जांच की बजाय सीधे एफआईआर कर दी जाती है, जबकि पहले जांच होनी चाहिए।

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सबसे आश्चर्यजनक बात तो ये है कि एक ही साथ भर्ती पटवारियों के वेतन में विसंगति है। इसे दूर करने की मांग सालों से की जा रही है। पटवारियों ने मुख्यालय में रहने की बाध्यता भी समाप्त करने की मांग की है।

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धरने पर मंगलवार को शंकर कतलाम, केजी यशवंत, जीवन सिंह कुुंजाम, हितेन्द्र पामभोई, टीएस ठाकुर, बी राजबाबू, रविन्द्र नेताम, के सुनीता, रविन्द्र पुजारी, सुमन कर्मा, इंद्र झाड़ी, लोकनाथ मिच्चा, मिच्चा पैंटया, कमला नेताम, श्वेता नेताम, कंवल जुर्री, रेणुका नेताम एवं अन्य पटवारी बैठे थे।

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पूरी जिंदगी पटवारी के पद पर ही

कई पटवारी पूरा सेवाकाल पटवारी के पद पर ही काट लेते हैं। उनका प्रमोशन नहीं होता है। संगठन की मांग है कि 45 साल की अवस्था या 20 साल की सेवा होने पर पटवारी को राजस्व निरीक्षण के पद पर पदोन्नत किया जाना चाहिए। अतिरिक्त हलके का प्रभार दिए जाने पर 10 साल पुराने दर पर केवल 250 रूपए दिया जाता है जबकि कम से कम 1000 रूपए दिया जाना चाहिए।

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