16 बरस बाद एक ही दिन 14 स्कूलों में बजी घंटी… 900 बच्चों को मिली अशिक्षा की बेड़ियों से मुक्ति

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16 बरस बाद एक ही दिन 14 स्कूलों में बजी घंटी… 900 बच्चों को मिली अशिक्षा की बेड़ियों से मुक्ति

पंकज दाऊद @ बीजापुर। जिला मुख्यालय के 40 किमी के दायरे में आने वाले बीजापुर ब्लाॅक के 14 गांवों में शुक्रवार को जश्न-सा मंजर था। दरअसल, इन गांवों में 16 बरस बाद स्कूलों की घंटी बजी। इस ब्लाॅक में इस तरह करीब नौ सौ बच्चे अशिक्षा की बेड़ियों से मुक्त हो गए।

सलवा जुड़म के बाद ब्लाॅक में कई स्कूल बंद हो गए थे। माओवादियों ने कई स्कूलों को इस बिनाह पर ढहा दिया था कि यहां फोर्स का बसेरा हो सकता है। भवन नहीं होने से गांव के बच्चे पोटा केबिन या आश्रम शालाओं में भर्ती हो गए तो कई बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी।

बीजापुर ब्लाॅक में 2014 में 10 बंद स्कूल खोले गए। तब यहां स्कूलों में दर्ज संख्या 40 से 50 की थी। कुछ समय बाद इन स्कूलों के बच्चे पोटा केबिन में चले गए और दर्ज संख्या कुछ कम हो गई लेकिन आज भी ये स्कूल बदस्तूर संचालित हैं।

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– मिंगाचल नदी पार करते शिक्षक।

दो साल पहले इस ब्लाॅक में ऐसे 6 स्कूल खोले गए। पिछले साल कोरोना के चलते स्कूल तो नहीं खोले गए अलबत्ता बंद स्कूलों को खोलने की प्रक्रिया जारी थी। इस साल 14 स्कूल खोले गए। सालों से बंद पड़े स्कूलों को खोलना टेढ़ी खीर था क्योंकि इसमें गांव के लोगों की रजामंदी भी जरूरी थी।

बीईओ मो जाकिर खान एवं बीआरसी कामेश्वर दुब्बा के मुताबिक गांव के लोगों की सहमति पर स्कूल खोले गए। कलेक्टर ने साइट सलेक्शन के लिए कहा। नए स्कूल शेडनुमा बनाए गए हैं और इनमें साढ़े-साढ़े 4 लाख का खर्च बैठा है। भवन बनाने में गांव के लोगों ने भी सहयोग किया।

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इस साल कमकानार, पेदाजोजेर, डुवालीपारा, चोखनपाल, मेटापाल, मर्रीवाड़ा, बुरजी, मल्लूर, पालनार, मंझारपारा पालनार, पुसनार, गायतापारा पुसनार, कड़ेनार, गुज्जाकोंटा एवं कचलारम में बंद पड़े स्कूलों को खोला गया। यहां 10 हजार रूपए के मानदेय पर उसी गांव के 12 पास युवाओं को ज्ञानदूत के रूप में पदस्थ किया गया है।

नदी पार गांवों में संचालन आसान नहीं

बीईओ जाकिर खान एवं बीआरसी कामेश्वर दुब्बा के साथ सीएसी व शिक्षक शुक्रवार को यहां से कोई 30 किमी दूर कमकानार एवं पेदाजोजेर में स्कूल खोलने गए। गंगालूर रोड से रेड्डी गांव के बाद मिंगाचल नदी तक नालों और पगडंडियों को किसी तरह पार करते ये टीम पहुंची।

अब सामने थी, बैलाडिला की पर्वत श्रृंखला से निकलने वाली पहाड़ी नदी मिंगाचल। इसमें काफी पानी था और बहाव भी तेज था। बाइक को नदी पार ले जाना था क्योंकि नदी पार से करीब 6 किमी दूर जंगली रास्ते से पेदाजोजेर तक पहुंचना था।

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बाइक को लकड़ी की बल्लियों के सहारे कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने नदी के पार लगाया। बारिश भी रूक-रूककर हो रही थी। पेदाजोजेर एवं कमकानार पहुंच स्कूल को शुरू किया गया। इस टीम में सीएसी राजेश सिंह, किरण कावरे, नागेश जुमार, नवल सिंह यादव एवं अन्य शामिल थे।

– पेदाजोजेर गांव में 16 साल बाद खुला स्कूल।

उत्सव सा लगा

स्कूल खुलने पर गांव में उत्सव सा माहौल था। पूरा गांव स्कूल के ईर्द गिर्द एकत्र था। महिलाएं अपने बच्चों को लेकर आईं थीं। गांव के गायता पेरमा एवं बड़े-बुजूर्ग मौजूद थे। सभी बच्चों को यूनिफार्म एवं लेखन सामग्री दी गई। इसके अलावा क्रिकेट, व्हालीबाॅल, बेडमिंटन एवं अन्य खेल की सामग्री दी गई। बच्चों में बिस्कुट का वितरण किया गया। ड्रेस पहन बच्चे काफी उत्साहित लग रहे थे।