कोरोना की दहशत के बीच अब ‘ब्लैक फंगस’ की एंट्री, 15 मरीज AIIMS में भर्ती

51

कोरोना की दहशत के बीच अब ‘ब्लैक फंगस’ की एंट्री, 15 मरीज AIIMS में भर्ती

रायपुर @ खबर बस्तर। छत्तीसगढ़ में जारी कोरोना के कहर के बीच अब ब्लैक फंगस से होने वाली ‘म्यूकस माइकोसिस’ नाम की दुर्लभ बीमारी ने भी एंट्री कर ली है। राजधानी रायपुर के एम्स हॉस्पिटल में ब्लैक फंगस से पीड़ित 15 मरीज भर्ती कराए गए हैं।

खबर की पुष्टि एम्स प्रबन्धन द्वारा की गई है। बताया गया है कि अभी तक कोरोना से ठीक हुए बुजुर्ग मरीज ही इसके शिकार हुए हैं। ज्यादातर मरीजों की आंखों में इन्फेक्शन फैला है। पिछले 10 दिनों में प्रदेश में 14 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

यह भी पढ़ें :  सचिन ने किया ट्वीट तो दिव्यांग मड्डाराम की बढ़ी पूछपरख, किक्रेट किट लेकर स्कूल पहुंचा प्रशासन

Read More:

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने भी प्रदेश में ब्लैक फंगस के प्रकोप की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं। बीमारी के इलाज के लिए आवश्यक दवाइयों और जरूरी इंजेक्शन की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई होगी।

यह भी पढ़ें :  जवान ने पत्नी की गोली मारकर की हत्या, फिर खुद भी कर ली खुदकुशी

बता दें ​कि एम्स में भर्ती 15 मरीजों की प्रारंभिक जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। इनमें से 8 के आंखों में इन्फेक्शन है। आशंका जताई जा रही है कि पूरे प्रदेेश में इस बीमारी से ग्रसित 50 से अधिक मामले सामने आ सकते है। हालांकि, अभी तक उनकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

सीएम ने दवा उपलब्धता के दिए निर्देश

इधर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के सभी जिलों में ब्लैक फंगस के उपचार के लिए सभी जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसपर ध्यान रखने को भी कहा गया है। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने कहा कि कोरोना मरीजों को स्टेरॉइड के इस्तेमाल को लेकर डॉक्टरों के लिए जल्द गाइडलाइन जारी होगी।

यह भी पढ़ें :  सुकमा में CRPF के 2 और जवान मिले कोरोना पॉजिटिव, दोरनापाल में किया गया था क्वारेंटाइन...जिले में एक्टिव मरीजों की संख्या 5 हुई, सभी संक्रमित मरीज पैरामिलिट्री के जवान

प्रदेश में दवाओं की कमी

ब्लैक फंगस के इलाज में पोसाकोनाजोल और एम्फोटेरेसीन-बी इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। छत्तीसगढ़ में यह बीमारी रेयर है। ऐसे में इस तरह की दवाएं कम ही उपलब्ध हैं। रायपुर में एक स्टाकिस्ट के यहां इंजेक्शन के 700 वायल इसी बीच खत्म हो गए हैं। स्टाकिस्ट अब दवा निर्माताओं को आर्डर भेज रहे हैं।