आलू व प्याज के बदले महुए की खरीदी… कंप्यूटर युग में भी वस्तु विनिमय थमा नहीं !

117

आलू व प्याज के बदले महुए की खरीदी… कंप्यूटर युग में भी वस्तु विनिमय थमा नहीं !

पंकज दाऊद @ बीजापुर। जिले के हाट बाजारों में कंप्यूटर युग में भी वस्तु विनियम का दौर चल रहा है और यहां आलू व प्याज के बदले महुए की खरीदी व्यापारी आदिवासियों से कर रहे हैं।

– चेरपाल बाजार।

जिला मुख्यालय से महज 15 किमी दूर गंगालूर रोड पर चेरपाल के रविवार साप्ताहिक हाट में ये देखने को मिला। यहां आसपास के गांवों से लोग महुआ और करंज के बीज लेकर आते हैं और आलू, प्याज व टमाटर के बदले इन्हें दे जाते हैं।

कुछ आदिवासी जो नगद चाहते हैं, उनसे नगद में खरीदी की जाती है। चेरपाल बाजार में सड़क किनारे कुछ गल्ला व्यापारी मौजूद रहते हैं और आदिवासियोें से ये वनोपज खरीदते हैं। यहां कमकानार, गंगालूर, चोकनपाल, सावनार, पालनार, तोड़का, जोजेर आदि गांवों से हर रविवार लोग आते हैं।

यह भी पढ़ें :  मोलसनार के जंगलों में DRG के जवानों व नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़, जानिए क्यों सामान छोड़कर भागे माओवादी
– महुए के बदले आलू और प्याज।

गंगालूर के व्यापारी नरेन्द्र हेमला भी यहां खरीदी करते हैं। वे बताते हैं कि गांव के लोगों को आलू, प्याज, टमाटर आदि की जरूरत होती है और वे महुए व करंज बीज की ‘पलटी’ में आलू-प्याज ले जाते हैं। वे करंज बीज व महुए को 40 रूपए किलो की दर से खरीदते हैं। फिर इसे जिला मुख्यालय या अन्य स्थानों से आने वाले बड़े व्यापारियों को 45 रूपए किलो के भाव में बेच देते हैं।

यह भी पढ़ें :  नक्सली चंगुल से आजाद हुआ CRPF जवान, 5 दिन बाद माओवादियों ने किया रिहा...'खबर बस्तर' रिपोर्टर के साथ बाइक पर लौटा जवान

Read More:

 

एक अन्य व्यापारी दूला हेमला ने बताया कि अभी टमाटर चालीस, आलू तीस व प्याज 30 रूपए की दर पर बिक रहा है। वे बताते हैं कि गांव के लोग बाजार में अपनी जरूरत की चीजों की खरीदी करने आते हैं और इसके लिए उन्हें नगद की जरूरत होती है। ऐसे लोग करंज और महुए बेचकर नगद ले जाते हैं।

उन्होंने बताया कि गांव से लोग दो से पांच किलो तक ही वनोपज लाते हैं। इससे उनकी जरूरत पूरी हो जाती है। अन्य सीजन में इमली, चार बीज व अमचूर आता है। इसे भी पलटी में लोग बेचते हैं।

यह भी पढ़ें :  अंजलि का चेक सरकारी सिस्टम में फंसा, आशियाना फिर से बसाने पिता को कैश की आस

सदियों पुराने माप

गांव के हाट बाजारों में ही नहीं अपितु जिला मुख्यालय में भी आज भी सदियों पुराने माप का प्रचलन है। पायली और सोली ये माप प्रणाली है। आश्चर्यजनक बात तो ये है कि किलो पर नहीं बल्कि पायली और सोली के माप पर गांव के लोगों को आज भी भरोसा है। ये मापन प्रणाली अवैध है। यहां नाप तौल विभाग सक्रिय नहीं है और इसका फायदा व्यापारी उठा जाते हैं।