आर्थिक नाकेबंदी: नक्सल समस्या का स्थायी हल भी चाहते हें आदिवासी… सिलगेर के दोषियों पर एफआईआर की मांग दोहराई

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आर्थिक नाकेबंदी: नक्सल समस्या का स्थायी हल भी चाहते हें आदिवासी… सिलगेर के दोषियों पर एफआईआर की मांग दोहराई

पंकज दाऊद @ बीजापुर। आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने नक्सल समस्या के स्थायी समाधान एवं सिलगेर गोलीकाण्ड के दोषियों पर एफआईआर समेत 20 मांगों को लेकर सोमवार की सुबह नैशनल हाईवे में  तुरनार तिराहे पर आर्थिक नाकेबंदी की। कुछ देर प्रदर्शन के बाद पुलिस की समझाईश पर आर्थिक नाकेबंदी खत्म कर दी गई।

सर्व आदिवासी समाज ने इस आशय का एक ज्ञापन राष्ट्रपति, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को सौंपा। आदिवासी नेताओं ने कहा है कि नक्सली समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है और सरकार को इसके लिए पहल करनी चाहिए।

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जेल में नक्सली मामलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग करते कहा गया है कि सिलगेर गोलीकाण्ड के दोषी जवानों पर एफआईआर की जानी चाहिए और मृतक के परिवार को 50-50 लाख रूपए का मुआवजा व परिवार के एक-एक सदस्य को नौकरी के अलावा घायलों को 5-5 लाख रूपए का मुआवजा दिया जाना चाहिए।

आदिवासी समाज ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी पाए लोगों पर कार्रवाई, पेसा कानून का कड़ाई से पालन, पांचवी अनुसूची वाले इलाकों में जिला एवं संभाग स्तर पर निकलने वाली भर्तियों में मूल निवासियों को प्राथमिकता दिए जाने की मांग करते कहा है कि खनन के लिए भूमि के अधिग्रहण की बजाए इसे लीज पर लेकर जमीन के मालिक को मालिकाना हक देना चाहिए। समाज ने बैकलॉग पदों पर भर्ती रोकने की मांग की है।

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आदिवासियों ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के नियमितिकरण, बीजापुर जिले में देवगुड़ियों के कायाकल्प,कुटरू में महाविद्यालय की स्थापना, बंद पड़े स्कूलों को खोलने, जिले में खाद-बीज उपलब्ध कराने, नगर पंचायतों को पुनः ग्राम पंचायत का दर्जा देने, वन अधिकार कानून का कड़ाई से पालन करवाने, आदिवासियों का उत्पीड़न रोकने आदि मांगों को ले आर्थिक नाकेबंदी की।

एसडीओपी आशीष कुंजाम एवं टीआई शाशिकांत भारद्वाज के हस्तक्षेप से आंदोलन खत्म किया गया। इस अवसर पर आदिवासी समाज की ओर से गुज्जाराम पवार, विश्वास तोगर, एससी मांझी, कमलेश पैंकरा, लक्ष्मण कड़ती, सुशील हेमला, सूरज पांदी, पीआर भगत, विनय उईके, लक्ष्मण परतागिरी, रामचंद्र, बीआर अमान, हरिकृष्ण कोरसा, विशाल सकनी प्रदीप गोरला आदि मुख्य रूप से मौजूद थे।

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