जवान की मौजूदगी पर सीबीआई अफसरों ने जताया खेद… पीड़ितों का बयान लिए बिना वापस लौटी टीम, अब अगस्त में होंगे बयान

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पंकज दाऊद @ बीजापुर। एड़समेटा में बातचीत के दौरान एक जवान के वहां पत्रकार बता मौजूद रहने पर सीबीआई की अफसर सारिका जैन ने गांव के लोगों के सामने खेद जताया। इधर, याची एवं आप नेत्री सोनी सोरी ने भी इस पर गहरा ऐतराज जताते विरोध किया है।

सूत्रों के मुताबिक सीबीआई टीम ने एड़समेटा में ग्रामीणों से मुलाकात के बाद अगस्त में गंगालूर में आकर बयान देने कहा है। आप नेत्री सोनी सोढ़ी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने बयान के दौरान किसी भी पुलिस के जवान की मौजूदगी पर सख्त पाबंदी लगाई थी लेकिन एक जवान शुक्रवार को सीबीआई टीम के आसपास खुद को पत्रकार बताकर मौजूद था।

यही नहीं, वह सीबीआई टीम और ग्रामीणों के बीच हो रही बातचीत के दौरान भी था। आप नेत्री सोनी के मुताबिक जब टीम लौट रही थी, तो गांव की महिलाओं ने उस व्यक्ति का जूता देख पहचाना और उसे पकड़कर सीबीआई के सामने लाया गया। तब उस शख्स ने कबूल किया कि वह जवान है।

 

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सीबीआई टीम लीडर सारिका जैन ने ग्रामीणों से खेद जताते कहा कि अभी बयान नहीं हो रहा है। सोनी सोरी ने भविष्य में बयान के दौरान इस पर बात खास गौर करने का आग्रह सीबीआई से किया है। हालांकि, आप नेत्री ने कहा कि मीडियाकर्मियों के बारे में कोर्ट ने उनके रहने या नहीं रहने के बारे में कोई जिक्र नहीं किया है।

कदम काबिले ए तारीफ: 
याची सोनी सोढ़ी ने एक महिला सीबीआई अफसर के एड़समेटा जैसे अंदरूनी गांव में पैदल जाने को काबिल ए तारीफ बताते कहा कि वहां जाना ही हिम्मत का काम है। पहाड़ी रास्तों पर उन्हें मीलों पैदल चलना पड़ा। उन्होंने विधायक विक्रम मण्डावी और एसपी दिव्यांग पटेल का भी आभार मानते कहा कि सारी सुविधाएं टीम को दी गईं। किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं आई।

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फिर आएगी टीम: 
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की टीम फिर से अगस्त में आएगी। शुक्रवार को गंगालूर पहुंचते टीम को रात हो गई थी। टीम रात में गंगालूर में ही रूकी और सुबह जिला मुख्यालय आई। फिर वह लौट गई। आप नेत्री ने बताया कि अगस्त में गंगालूर में बयान लेने की नोटिस पीड़ित परिवारों को दी गई है लेकिन इसका ये कहकर विरोध किया जा रहा है कि बयान गांव में ही हो।

सोनी सोड़ी ने पत्रकारों को बताया कि वे गंगालूर में आकर बयान देने के लिए ग्रामीणों को समझाएंगी क्योंकि अंदरूनी गांव जाना सीबीआई अफसरों को परेशानी में डालने वाला होता है। इसके अलावा कंप्यूटर टाइपिंग आदि की सुविधा भी गांव में नही है।

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