थाईलैंड के मशहूर ‘ड्रैगन फ्रूट’ की खेती अब हो रही बस्तर के इस इलाके में…जानिए क्या है ‘ड्रैगन फ्रूट’ और क्यों खास है यह विदेशी फल

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Now dragon fruit farming is happening in Bastar

कबीर दास @ पखांजुर। आपने कहानियों और किताबों में ड्रैगन व ड्रैगन के अंडे के बारे में जरुर पढ़ा या सुना होगा। लेकिन क्या अपने कभी ‘ड्रैगन फ्रूट’ के बारे में सुना है। यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताना चाहेंगे की अब ड्रैगन फ्रूट की फसल छत्तीसगढ़ में भी होने लगी है।

थाईलैंड और वियतनाम में पाए जाने वाले ‘ड्रैगन फ्रूट’ की खेती बस्तर के पखांजूर क्षेत्र में भी की जा रही है। परलकोट के किसान इस विदेशी फल को लगा रहे हैं। वैसे तो पखांजूर में मक्का, धान की फसल आम है। लेकिन अब किसानों ने ‘ड्रैगन फ्रूट’ की खेती भी शुरू कर दी है और इससे वे अच्छा खासा लाभ कमा रहें हैं।

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पखांजूर क्षेत्र में किसान सिर्फ अपनी आमदनी और रोजगार के लिए खेती किसानी का कार्य नहीं करते हैं, बल्कि वे नई तकनीक अपनाने में भी आगे रहते हैं। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाया है पीव्ही 122 के किसान विद्युत मंडल ने। वे बीते कुछ समय से ‘ड्रैगन फ्रूट’ की खेती कर रहे हैं।

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Now dragon fruit farming is happening in Bastar

विद्युत मंडल बताते हैं यह एक आधुनिक खेती हैं। इसमें खाफी खर्चा होता हैं। ड्रैगन फ्रूट का तना बेल की लम्बा होते रहता है। जिसके लिए उसे पर्याप्त जगह की आवश्कता पड़ती हैं। प्रत्येक वृक्ष को खंबे के सहारे लकड़ी की छत बना कर उपर चढ़ाना पड़ता है। वरना फसल को बचा पाना संभव नहीं है।

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किसान विद्युत ने बताया ‘ड्रैगन फ्रूट की खेती करने की चाहत बीते 10 वर्षों से थी पर कोई जरिया नहीं मिल रहा था। मुझे मालूम नहीं था कि ये फल कैसे और कहां से मिल सकता है। तभी मुझे पता चला कि यह थाईलैंड में मिलेगा तो मैंने किसी तरह इसे अपने मित्र के जरिये इसे थाईलैंड से बांग्लादेश में मंगवाया। फिर वहां जाकर मैंने इसका बीज लाया और लगा दिया।’

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मंडल ने बताया कि शुरूआती दो साल तक मुझे कोई कामयाबी नहीं मिली। दो वर्ष बाद पौधों ने ग्रोध लिया और फल लगा। इसकी खेती में मुझे तकरीबन 2-3 लाख रुपया का खर्चा बैठ गया। वे बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की खेती में सिंचाई की जरूरत न के बराबर है। कम पानी में भी फसल तैयार हो जाती है। साल में दो बार इसकी फसल ली जा सकती है।

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जानिए क्या है ड्रैगन फ्रूट:

ड्रैगन फ्रूट एक स्वादिष्ट विदेशी फल है, जो पीताया या पीतहाया के नाम से भी जाना जाता है। इसके औषधीय गुणों के कारण इसे खाने में उपयोग किया जाता है इस फल को सुपर फूड भी कहा जाता है। इसके फूल रात को ही खुलते हैं। यह फल लाल रंग का होता है साथ ही इसकी पत्तियां हरे रंग की होती हैं, जो ड्रैगन की तरह दिखती हैं इसलिए इसे ड्रैगन फ्रूट कहते हैं।

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ड्रैगन फ्रूट एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, और पोषण गुणों का एक अच्छा स्त्रोत माना जाता है जो खतरनाक रोगों से शरीर को मुक्त करवाता है। इसके बीज कैंसर से लड़ने में भी मदद करते हैं। यह ज्यादातर सफेद गुदे और काले बीज का होता है। इसका स्वाद थोड़ा बहुत किवी और नाशपाती की तरह होता है।

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पिछले कई साल से इसे थाईलैंड, श्रीलंका, वियतनाम आदि से इसे निर्यात किया जा रहा है। इसके भारी मांग को देखते हुए अब इसकी खेती भारत में भी होने लगी है। महाराष्ट्र और गुजरात के अलावा आंध्र, कर्नाटक, अरुणाचल, सिक्किम और मणिपुर के किसान पिछले कुछ वर्षों से इसकी खेती कर भारी लाभ कमा रहे हैं।


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