खेतों पर पड़ा कोविड का असर, खाली पड़े खाद के गोदाम… फैक्ट्रियों में उत्पादन कम, रेलवे स्टेशन में नहीं पहुंचे रेक

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खेतों पर पड़ा कोविड का असर, खाली पड़े खाद के गोदाम… फैक्ट्रियों में उत्पादन कम, रेलवे स्टेशन में नहीं पहुंचे रेक

पंकज दाउद @ बीजापुर। कोरोना महामारी से लाॅकडाऊन के चलते इस साल फैक्ट्रियों में तीन-चार माह तक उत्पाद ठप रहा और इसका सीधा असर अब खेतों में दिख रहा है। जिले के दोनों गोदाम खाली पड़े हैं। इनमें ना तो यूरिया है और ना ही डीएपी, जबकि अभी इनकी धान की फसलों की बढ़वार के लिए बेहद जरूरत है।

– खाद की कमी से जूझ रहे किसान।

जिला मुख्यालय एवं भोपालपटनम में जिला विपणन कार्यालय के दो गोदाम हैं। इनमें डीएपी का एक भी बारदाना नहीं हैं। हालांकि यूरिया अभी केवल 60 टन बचा है। बताते हैं कि डीएपी और यूरिया की डिमाण्ड अभी 17-17 सौ टन है।

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डीएमओ प्रमोद सोम के मुताबिक अब तक 550 मैट्रिक टन डीएपी की वितरण हो गया है जबकि 457 टन यूरिया किसानों को लैम्प्स के माध्यम से दे दिया गया है। 60 मैट्रिक टन यूरिया बुधवार को ही आया है और इसे एक-दो दिनों में लैम्प्स में भेज दिया जाएगा।

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ये उर्वरक इफ्को, आईपीएल आदि कंपनियों से बारास्ता विशाखापटनम आते हैं। अभी उर्वरक के रेक जगदलपुर रेलवे स्टेशन में नहीं आए हैं। बकौल, डीएमओ प्रमोद सोम कंपनियों की भी मजबूरी है। लाॅकडाऊन के कारण उत्पादन ठप रहा और इसकी सप्लाइ्र्र नहीं हो पाई।

जहां तक पोटाश की बात है, जिले में इसकी खपत नहीं के बराबर है। पिछले साल 25 टन पोटाश मंगाया गया था और इसमें से 10 टन पोटाश अभी भी बचा हुआ है।

आधार खाद की कमी का पड़ेगा असर

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक बीके ठाकुर ने बताया कि अभी आधार खाद यानि डीएपी की जरूरत है। इसमें नाइट्रोजन एवं फास्फोरस 18ः46 के अनुपात में होते हैं। रोपा, लेही एवं बोवाई से पहले इसकी जरूरत पड़ती है। वहीं यूरिया को तीन बार खेतों में डाला जाता है।

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पहली बार अभी इसे डाला जाना है और फिर शाखा निकलने से पहले। इसके बाद फूल निकलने से पहले इसे डाला जाता है। म्यूरेट आफ पोटाश या मिर्ची खाद की जरूरत भी पड़ती है।